रायपुर/महासमुंद। छत्तीसगढ़ सर्व रविदास समाज ने पूरे प्रदेश के 33 जिलों में एक साथ कलेक्टरों को मुख्यमंत्री के नाम विस्तृत ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में समाज ने संत रविदास जी के अनुयायियों—मोची, मेहर, अहिरवार, जाटव, कुरील, सूर्यवंशी, कनीटिया आदि—के सामाजिक, आर्थिक, शैक्षणिक और राजनीतिक उत्थान के लिए 14 प्रमुख मांगें रखी हैं। समाज का कहना है कि आज भी लाखों की आबादी वाला यह वर्ग विकास की मुख्य धारा से काफी पिछड़ा हुआ है, ऐसे में सरकार से तत्काल हस्तक्षेप और ठोस नीति अपेक्षित है।
संत रविदास जयंती पर सार्वजनिक अवकाश की मांग
ज्ञापन में कहा गया कि संत रविदास जयंती (माघी पूर्णिमा) पर सार्वजनिक अवकाश घोषित किया जाए, ताकि संत रविदास जी के दर्शन, सिद्धांत और सामाजिक समानता के संदेश को राज्यभर में सम्मान मिल सके।
जाति प्रमाण पत्र प्रक्रिया में सरलीकरण की आवश्यकता
समाज ने जाति प्रमाण पत्र बनाने में 50 वर्ष पुराने अभिलेखों की अनिवार्यता समाप्त करने की मांग रखी है, ताकि आमजन को बार-बार कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें।
संत रविदास उत्थान पुरस्कार और प्रतिनिधित्व की मांग
रविदास समाज ने “संत शिरोमणि गुरु रविदास सामाजिक उत्थान पुरस्कार” की स्थापना कर समाजहित में कार्य करने वाले व्यक्तियों एवं संस्थाओं को सम्मानित करने का आग्रह किया है। साथ ही छ.ग. चर्म शिल्प बोर्ड, अनुसूचित जाति विकास प्राधिकरण, आयोग-निगम-बोर्ड सहित विभिन्न संस्थाओं में समाज को उचित राजनीतिक प्रतिनिधित्व देने की भी मांग की गई है।
‘रविदासधाम’ के लिए 25 एकड़ भूमि एवं 100 करोड़ का प्रावधान
नवा रायपुर में रविदासधाम की स्थापना हेतु 25 एकड़ भूमि और 100 करोड़ रुपये का बजट आबंटित करने की मांग प्रमुख रही। समाज का कहना है कि इससे राज्य में धार्मिक, सांस्कृतिक एवं सामाजिक गतिविधियों का केंद्र स्थापित होगा।
संत रविदास चौक और आदमकद प्रतिमा की मांग
राजधानी के प्रमुख चौराहे का नाम “संत रविदास चौक” घोषित करने और वहां संत श्री रविदास जी की आदमकद प्रतिमा स्थापित करने की मांग भी ज्ञापन में शामिल है।
व्यवसाय एवं रोजगार के अवसर बढ़ाने पर जोर
समाज के परंपरागत व्यवसाय में लगे कारीगरों और बेरोजगार युवाओं को दुकानों का आवंटन, नगरीय क्षेत्रों में स्थायी दुकान/कॉम्प्लेक्स उपलब्ध कराने, लोन और अनुदान की व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की गई है। साथ ही पुलिस, नगर सेना और सरकारी विभागों में समाप्त किए गए “मोची पद” को पुनः सृजित कर नियुक्ति रविदास समाज से करने का आग्रह किया गया।
शिक्षा और बुनियादी सुविधाओं में सुधार के प्रस्ताव
निजी शैक्षणिक संस्थानों में छात्रों के लिए विशेष आरक्षण स्लॉट, सभी जिला मुख्यालयों में सामुदायिक भवन/छात्रावास, तथा प्रत्येक जिले में 20-20 लाख रुपये का बजट प्रावधान करने की मांग भी प्रमुख रही।
मेहर जाति को सही क्रमांक में शामिल करने का अनुरोध
ज्ञापन में कहा गया कि मेहर जाति को वर्तमान में अनुसूचित जाति सूची के क्रमांक 33 में रखा गया है, जबकि उसे क्रमांक 14 में शामिल किया जाना चाहिए।
पूरे प्रदेश में एक स्वर—“समान अधिकार, समान सम्मान”
ज्ञापन सौंपने के दौरान समाज के प्रतिनिधियों ने कहा कि रविदास समाज लंबे समय से सामाजिक-राजनीतिक पिछड़ेपन का सामना कर रहा है। अब समय है कि सरकार इस महत्वपूर्ण वर्ग की समस्याओं को गंभीरता से लेकर त्वरित निर्णय करे।



