महासमुंद। छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले में कक्षा 4 की अर्धवार्षिक परीक्षा (सत्र 2025-26) के अंग्रेजी विषय के प्रश्नपत्र में आए विवाद ने अब सामाजिक तनाव का रूप ले लिया है। प्रश्न “What is the name of Mona’s dog?” के विकल्पों में ‘RAM’ (राम) शब्द शामिल होने से हिंदू संगठनों के विरोध के बाद जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) विजय कुमार लहरे के खिलाफ जांच शुरू हुई है। अब अनुसूचित जाति (एससी) समाज सहित अन्य संगठनों ने इसे एकतरफा कार्रवाई बताते हुए गहरा आक्रोश जताया है।
समाज का आरोप है कि यह त्रुटि रायपुर संभाग के अन्य जिलों (धमतरी, रायपुर, बलौदा बाजार, गरियाबंद) में भी एक ही प्रश्नपत्र वितरित होने के बावजूद केवल महासमुंद में ही उठाई जा रही है, जहां डीईओ अनुसूचित जाति से हैं। समाज ने इसे जातिगत भेदभाव की कोशिश करार दिया है।
अनुसूचित जाति समाज के पदाधिकारियों ने संयुक्त संचालक (जांच अधिकारी) को लिखित ज्ञापन सौंपा है, जिसमें मांग की गई है कि पूर्ण जांच के बाद ही किसी भी कार्रवाई पर विचार किया जाए। ज्ञापन में कहा गया है कि मूल पांडुलिपि में यह प्रश्न या विकल्प मौजूद नहीं था, इसलिए मुद्रण स्तर पर हुई त्रुटि की जांच होनी चाहिए। बिना पूरी जांच के डीईओ के खिलाफ एकतरफा कार्यवाही होने पर समाज आंदोलन करने को बाध्य होगा।
ज्ञापन सौंपने के दौरान अनुसूचित जाति समाज के सलाहकार दिनेश बंजारे, संरक्षक विजय बंजारे, जिलाध्यक्ष रेखराज बघेल, अजाक्स (अनुसूचित जाति जनजाति अधिकारी कर्मचारी शासकीय सेवक संघ) के प्रांतीय सचिव एस.पी. ध्रुव, जिला उपाध्यक्ष अनिल ढीढी, सचिव तुलेंद्र सागर, दीनबंधु निरालासहित अन्य पदाधिकारी उपस्थित रहे।
समाज का कहना है कि प्रश्नपत्र निर्माण समिति द्वारा तैयार मूल पांडुलिपि में इस तरह का कोई प्रश्न नहीं था। मुद्रण प्रेस में हुई संभावित गड़बड़ी की जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए, न कि केवल जिला शिक्षा अधिकारी को निशाना बनाया जाए।
यह विवाद पिछले कुछ दिनों से सुर्खियों में है। हिंदू संगठनों (विश्व हिंदू परिषद, बजरंग दल आदि) ने विरोध प्रदर्शन, रैली और धरना देकर डीईओ के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की थी। शिक्षा विभाग ने डीईओ को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। डीईओ ने खेद जताते हुए कहा था कि यह प्रिंटिंग स्तर की त्रुटि है और भविष्य में ऐसी गलती नहीं होगी।
अनुसूचित जाति समाज ने चेतावनी दी है कि यदि बिना संपूर्ण जांच के कार्रवाई हुई तो सर्व अनुसूचित जाति, जनजाति एवं अन्य सामाजिक संगठन बड़े स्तर पर आंदोलन करेंगे। समाज पूर्ण निष्पक्ष जांच और दोषी पर उचित कार्रवाई की मांग कर रहा है।शासन-प्रशासन की ओर से इस मामले में अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। स्थिति पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।


