रायपुर। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की रायपुर जोनल ऑफिस ने छत्तीसगढ़ के चर्चित मेडिकल उपकरण और री-एजेंट खरीद घोटाले में बड़ा एक्शन लिया है। ईडी ने मेसर्स मोक्षित कॉर्पोरेशन के पार्टनर शशांक चोपड़ा को प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA), 2002 के तहत 14 जनवरी 2026 को गिरफ्तार किया। शशांक चोपड़ा को 15 जनवरी को माननीय विशेष न्यायालय (PMLA), रायपुर के समक्ष पेश किया गया, जहां अदालत ने ईडी को 4 दिनों की हिरासत (यानी 19 जनवरी 2026 तक) मंजूर की है। जांच अधिकारी इस दौरान गहन पूछताछ कर रहे हैं।
यह मामला एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) और इकोनॉमिक ऑफेंस विंग (EOW), रायपुर द्वारा दर्ज FIR और चार्जशीट पर आधारित है। आरोप है कि शशांक चोपड़ा ने छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज कॉर्पोरेशन लिमिटेड (CGMSCL) और स्वास्थ्य सेवा निदेशालय (DHS) के कुछ वरिष्ठ अधिकारियों के साथ मिलकर टेंडर प्रक्रिया में भारी हेरफेर किया। फर्जी मांग दिखाकर राज्य को बहुत ऊंची कीमतों पर मेडिकल उपकरण और री-एजेंट सप्लाई किए गए, जिससे सरकारी खजाने को भारी नुकसान हुआ और आरोपियों को करोड़ों का अवैध लाभ मिला।
ईडी की जांच में खुलासा हुआ कि यह अपराध की कमाई (Proceeds of Crime) अनुसूचित अपराध से उत्पन्न हुई थी। इसके बाद शशांक चोपड़ा ने कई फर्मों/संस्थाओं को शामिल कर फर्जी ट्रेनिंग और मेंटेनेंस सर्विस समझौते बनवाए, जिससे अवैध धन को लेयर किया गया और अंत में बड़ी रकम नकद निकालकर रिश्वत और संपत्ति खरीद में इस्तेमाल की गई।
पहले भी PMLA की धारा 17 के तहत कई ठिकानों पर छापेमारी की गई थी, जिसमें 43 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति (बैंक बैलेंस, फिक्स्ड डिपॉजिट, शेयर, वाहन आदि) जब्त/फ्रीज की गई। कई महत्वपूर्ण दस्तावेज और डिजिटल डिवाइस भी बरामद हुए, जो मनी लॉन्ड्रिंग के सबूत पेश कर रहे हैं।
यह घोटाला पिछले कुछ वर्षों से सुर्खियों में है, जिसमें करोड़ों के ओवरप्राइस्ड सप्लाई के कई उदाहरण सामने आए थे। जांच एजेंसियां अब आगे के खुलासों की ओर बढ़ रही हैं। ईडी ने बताया कि जांच अभी जारी है और इसमें शामिल अन्य लोगों पर भी सख्त कार्रवाई की जा सकती है। राज्य के स्वास्थ्य क्षेत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए यह कार्रवाई अहम कदम मानी जा रही है।


