ठेकेदार और कर्मचारियों की मिलीभगत का आरोप, महीनों से चल रहा था लाखों के राजस्व नुकसान का खेल
महासमुंद। नगर पालिका परिषद में सरकारी संसाधनों के दुरुपयोग और प्रशासनिक लापरवाही का बड़ा मामला सामने आया है। नगर पालिका के उपाध्यक्ष देवीचंद राठी ने खुद मौके पर पहुंचकर एक पानी के टैंकर को पकड़ते हुए आरोप लगाया है कि पालिका के कुछ कर्मचारियों और ठेकेदार की मिलीभगत से नगरपालिका के बोर से अवैध रूप से पानी निकाला जा रहा था। इस पूरे घटनाक्रम ने नगरपालिका प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
जानकारी के अनुसार बीटीआई रोड पर नाली और सड़क निर्माण कार्य कर रहे ठेकेदार द्वारा राजामठ गेट (भलेसर रोड) स्थित नगरपालिका के बोर से लगातार पानी निकाला जा रहा था। शिकायत मिलने पर उपाध्यक्ष देवीचंद राठी पार्षद पीयूष साहू के साथ मौके पर पहुंचे, जहां लगभग 15 हजार लीटर क्षमता का एक बड़ा टैंकर बिना किसी अनुमति या रसीद के पानी भरते हुए पकड़ा गया। टैंकर पर “बेमेतरा” लिखा हुआ था। पूछताछ के दौरान चालक कोई भी वैध दस्तावेज या रसीद नहीं दिखा सका।
मामले को लेकर जब जल प्रभारी दुर्गेश कुंजेकर से फोन पर चर्चा की गई तो उन्होंने किसी भी प्रकार की रसीद कटने की जानकारी से साफ इंकार कर दिया। वहीं मुख्य नगर पालिका अधिकारी सलामे ने भी इस गंभीर मामले पर स्पष्ट जवाब देने के बजाय पल्ला झाड़ लिया। इससे प्रशासन की भूमिका पर संदेह और गहरा गया है।
उपाध्यक्ष राठी ने नाराजगी जताते हुए कहा कि एक ओर पालिका प्रशासन गरीब परिवारों के नल कनेक्शन काटने की कार्रवाई कर रहा है और शादी-दशगात्र जैसे आयोजनों के लिए 500 रुपये की रसीद वसूली जाती है, वहीं दूसरी ओर ठेकेदार द्वारा खुलेआम लाखों लीटर पानी की चोरी पर अधिकारी मौन साधे हुए हैं।
राठी के अनुसार यह अवैध खेल पिछले चार से पांच महीनों से लगातार चल रहा है। प्रतिदिन करीब चार से पांच बड़े टैंकर पानी भरा जा रहा था। यदि एक टैंकर की कीमत लगभग 1500 रुपये मानी जाए तो प्रतिदिन करीब 6000 रुपये का नुकसान हो रहा है। इस हिसाब से चार महीनों में नगरपालिका को लगभग 7 लाख रुपये से अधिक के राजस्व नुकसान का अनुमान लगाया जा रहा है।
निरीक्षण के दौरान यह भी देखा गया कि टैंकर भरते समय हजारों लीटर पानी व्यर्थ बह रहा था। उपाध्यक्ष ने कहा कि एक तरफ “जल ही जीवन है” का संदेश दिया जाता है, लेकिन दूसरी ओर नगर के बोर से पानी की खुलेआम चोरी और बर्बादी हो रही है, जो किसी बड़े सांठगांठ या प्रशासनिक लापरवाही की ओर इशारा करता है।
उपाध्यक्ष देवीचंद राठी ने मांग की है कि सीएमओ तत्काल संबंधित ठेकेदार को नोटिस जारी कर नगरपालिका अधिनियम के तहत कठोर कानूनी कार्रवाई करें। साथ ही अब तक हुए आर्थिक नुकसान की पूरी वसूली कर पूरे मामले की उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच कराई जाए, ताकि जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय हो सके।


