एक साल पहले बसी थी नई जिंदगी, अब उजड़ गया संसार… लापरवाही ने ली 28 वर्षीय आयुषी की जान
रिपोर्टर: रवि विदानी
- एक साल पहले बसी थी नई जिंदगी, अब उजड़ गया संसार… लापरवाही ने ली 28 वर्षीय आयुषी की जान
- बताया जा रहा है कि आयुषी अपने परिवार के साथ माता के दर्शन और बेहतर जीवन की कामना लेकर मंदिर पहुंची थी, लेकिन किसे पता था कि यह यात्रा उसकी आखिरी यात्रा बन जाएगी। एक तरफ जहां परिवार में नई जिंदगी की शुरुआत हुई थी, वहीं अब उसी घर में मातम पसरा हुआ है।
महासमुंद। जिले के प्रसिद्ध खल्लारी माता मंदिर में रविवार को चैत्र नवरात्रि के बीच हुआ रोपवे हादसा एक परिवार की खुशियों को हमेशा के लिए छीन ले गया। रायपुर निवासी 28 वर्षीय आयुषी साठकर, जिसकी शादी को अभी एक वर्ष ही हुआ था, इस भीषण दुर्घटना का शिकार हो गई।
बताया जा रहा है कि आयुषी अपने परिवार के साथ माता के दर्शन और बेहतर जीवन की कामना लेकर मंदिर पहुंची थी, लेकिन किसे पता था कि यह यात्रा उसकी आखिरी यात्रा बन जाएगी। एक तरफ जहां परिवार में नई जिंदगी की शुरुआत हुई थी, वहीं अब उसी घर में मातम पसरा हुआ है।
गौरतलब है कि आज रविवार सुबह करीब 10 से 11 बजे के बीच रोपवे की तार टूटने से ऊपर से नीचे आ रही ट्रॉली करीब 100 फीट की ऊंचाई से गिरकर चट्टानों में जा टकराई। हादसे में 17 लोग घायल हुए, जिनमें आयुषी की मौके पर ही मौत हो गई। 4 गंभीर घायलों को पहले और 4 गंभीर घायलों को रायपुर रेफर किया गया, जबकि अन्य का उपचार बागबाहरा स्वास्थ्य केंद्र में किया गया।
इस दर्दनाक घटना के बाद सबसे बड़ा सवाल यही उठता है कि आखिर ऐसी घटनाएं होती ही क्यों हैं? क्या प्रशासन, मंदिर ट्रस्ट और जिम्मेदार एजेंसियां किसी बड़े हादसे का इंतजार करती हैं? क्या रोपवे की नियमित जांच होती थी? क्या इसकी तार और मशीनरी सुरक्षित व मानकों के अनुरूप थी? आखिरी बार मेंटेनेंस कब किया गया था? निरीक्षण करने वाला अधिकारी कौन था? और अगर सब कुछ सही था, तो फिर यह हादसा कैसे हुआ?
घटना के बाद जो दृश्य सामने आया, उसने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए। जिस रोपवे से श्रद्धालुओं को सैकड़ों फीट ऊंचाई तक ले जाया जाता है, उसमें सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम नजर नहीं आए।प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, गिरने के बाद ट्रॉली पूरी तरह चकनाचूर हो गई, जिससे साफ है कि यात्रियों की सुरक्षा के लिए कोई प्रभावी बैकअप सिस्टम मौजूद नहीं था। घटना के बाद जिला प्रशासन ने जांच के आदेश दे दिए हैं और दोषियों पर कार्रवाई की बात कही जा रही है। लेकिन सवाल यह है कि क्या यह जांच सिर्फ औपचारिकता बनकर रह जाएगी, या वास्तव में जिम्मेदारों पर कड़ी कार्रवाई होगी?क्या आयुषी की मौत के बाद सिस्टम जागेगा? क्या भविष्य में ऐसे हादसों को रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे?
श्रद्धा के सफर में मौत का खतरा क्यों? हर साल हजारों श्रद्धालु खल्लारी माता के दर्शन के लिए पहुंचते हैं। लोग आस्था और विश्वास के साथ मंदिर आते हैं, लेकिन जब ऐसी लापरवाही सामने आती है, तो यह सिर्फ एक हादसा नहीं बल्कि पूरे सिस्टम की नाकामी बन जाती है।
खल्लारी मंदिर रोपवे हादसे में 28 वर्षीय आयुषी साठकर की मौत, 17 लोग घायल, 4 गंभीर रायपुर रेफर, रोपवे की तार टूटने से 100 फीट से गिरी ट्रॉली, मेंटेनेंस और सुरक्षा व्यवस्था पर उठे गंभीर सवा।क्या इस हादसे के बाद जिम्मेदारों की जवाबदेही तय होगी? या फिर हर बार की तरह जांच के नाम पर फाइलें ही चलती रहेंगी…और किसी दूसरी आयुषी की जिंदगी यूं ही खत्म होती रहेगी?


