Monday, 26 Oct 2026

कल हड़ताल पर रहेंगी आंगनबाड़ी कार्यकर्ता-सहायिकाएं, कलेक्ट्रेट घेराव कर सरकार से मांगेंगी हक

महासमुंद। लंबित मांगों को लेकर जिले की आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाएं मंगलवार, 27 अक्टूबर को एक दिवसीय हड़ताल करेंगी। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता-सहायिका संयुक्त मंच के बैनर तले आंदोलनरत महिला कर्मियां जिला मुख्यालय में कलेक्ट्रेट का घेराव कर सरकार के सामने अपनी मांगें रखेंगी। इस दौरान मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े सहित शासन के जिम्मेदारों के नाम ज्ञापन कलेक्टर को सौंपा जाएगा।

संयुक्त मंच का कहना है कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाएं वर्षों से बच्चों के पोषण, गर्भवती महिलाओं की देखभाल तथा शासन की योजनाओं को जमीनी स्तर पर पहुंचाने की जिम्मेदारी निभा रही हैं, लेकिन इसके बावजूद उन्हें नियमित कर्मचारी का दर्जा और सम्मानजनक मानदेय नहीं मिल पाया है। काम का बोझ लगातार बढ़ने के बावजूद सामाजिक सुरक्षा की पर्याप्त सुविधाएं नहीं मिलने से महिला कर्मियों में नाराजगी है।

मंच की प्रमुख मांग है कि कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को नियमित किया जाए। नियमितीकरण होने तक कार्यकर्ताओं को 30 हजार रुपये और सहायिकाओं को 25 हजार 500 रुपये प्रतिमाह मानदेय दिया जाए। इसके अलावा कार्यकर्ताओं को सुपरवाइजर तथा सहायिकाओं को कार्यकर्ता के पद पर सीधे पदोन्नति देने और पदोन्नति में उम्र की बाध्यता समाप्त करने की मांग की गई है।

महिला कर्मियों ने समूह बीमा, पेंशन, ग्रेच्युटी और भविष्य निधि (पीएफ) जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग भी उठाई है। सेवा के दौरान आकस्मिक मृत्यु होने पर अनुकंपा नियुक्ति, सेवानिवृत्ति पर कार्यकर्ता को पांच लाख रुपये और सहायिका को तीन लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने तथा मध्यप्रदेश की तर्ज पर प्रतिवर्ष मानदेय में एक हजार रुपये की वृद्धि करने की मांग भी आंदोलन का हिस्सा है।

संयुक्त मंच की ओर से सुधा रात्रे सहित रुक्मिणी सज्जन, कविता यादव, हेमा भारती, कल्पना चंद, अनिता नायक, पिंकी ठाकुर, पार्वती यादव, सुचित्रा मानिकपुरी और संतोषी वर्मा सहित अन्य महिला पदाधिकारी आंदोलन में सक्रिय हैं। हड़ताल और कलेक्ट्रेट घेराव के माध्यम से मंच शासन का ध्यान लंबित मांगों की ओर आकर्षित करते हुए उनके निराकरण की मांग करेगा।

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