रायपुर/जशपुरनगर। प्रदेश में लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पर सीधा हमला करने का मामला अब जशपुर से सामने आया है। सहायक संचालक जनसम्पर्क कार्यालय नूतन सिदार ने पत्रकारों को धमकी भरा कानूनी नोटिस भेजकर बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है।
बड़ा सवाल
👉 क्या इस नोटिस के लिए उन्होंने शासन/प्रशासन से पूर्व अनुमति ली थी?
👉 यदि अनुमति नहीं ली, तो क्या यह सेवा आचरण नियमों का खुला उल्लंघन नहीं है?
Central Civil Services (Conduct) Rules, 1964 के नियम स्पष्ट कहते हैं कि –
कोई भी शासकीय सेवक यदि मानहानि या व्यक्तिगत चरित्र रक्षा (Vindication of Acts & Character) हेतु कानूनी कार्यवाही करना चाहता है, तो उसे पहले शासन से अनुमति लेना अनिवार्य है।
लेकिन यहां अधिकारी ने अपने पदनाम का इस्तेमाल कर सीधे पत्रकारों को धमकाया।
पत्रकार संगठनों का आरोप
पत्रकार संगठनों ने इसे सीधा हमला बताया है –
“सरकार पत्रकार सुरक्षा कानून की बात करती है, लेकिन सरकारी अधिकारी ही पत्रकारों को डराने में लगे हैं। यह लोकतंत्र और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर सीधा प्रहार है।”
प्रशासन पर सवाल
अब पूरे प्रदेश में चर्चा है कि –
👉 क्या जशपुर के कलेक्टर और जनसम्पर्क विभाग कार्रवाई करेंगे?
👉 या यह मामला भी फाइलों में दब जाएगा?
यह विवाद सिर्फ एक नोटिस का नहीं, बल्कि पत्रकारिता की स्वतंत्रता बनाम अधिकारीशाही की दबंगई का है। यदि बिना अनुमति नोटिस भेजने पर कार्रवाई नहीं होती, तो यह साफ संदेश होगा कि प्रशासन अपने ही अधिकारियों को पत्रकारों पर अत्याचार की खुली छूट दे रहा है।


