महासमुंद। नगर पंचायत तुमगाँव के अध्यक्ष बलरामकांत साहू की अचानक हुई गिरफ्तारी को लेकर नगर के नागरिकों और जनप्रतिनिधियों ने गंभीर आपत्ति दर्ज कराई है। उन्होंने पुलिस अधीक्षक, महासमुंद को ज्ञापन सौंपते हुए इस मामले में निष्पक्ष जांच की मांग की है।
ग़ौरतलब है कि दिनांक 29 अगस्त की सुबह 5.30 बजे पुलिस ने नगर पंचायत अध्यक्ष बलरामकांत साहू को अप्रत्याशित रूप से घर से उठाकर उनके खिलाफ एक कथित फर्जी एफआईआर दर्ज कर जेल भेज दिया। इस कार्रवाई के विरोध में नगर पंचायत पार्षदों और नगरवासियों ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं।
नगर पंचायत प्रतिनिधियों ने बताया कि गिरफ्तारी से कुछ ही दिन पहले बलरामकांत साहू ने अपने सहयोगी पार्षदों और नगरवासियों के साथ मिलकर अवैध देह व्यापार और अवैध शराब विक्रय पर रोक लगाने के लिए थाना प्रभारी, तुमगाँव को आवेदन प्रस्तुत किया था। लेकिन उस पर कार्रवाई करने के बजाय उल्टा शिकायतकर्ता अध्यक्ष को ही गिरफ्तार कर लिया गया।
पार्षदों और नागरिकों की मांग
जनप्रतिनिधियों का कहना है कि प्रकरण में जिस प्रार्थिया (शिकायतकर्ता महिला) का हवाला देकर केस दर्ज किया गया है, उसके संबंध और सलाहकारों की भी निष्पक्ष जांच की जानी चाहिए। उनका आरोप है कि इस पूरे मामले में एक बड़े षड्यंत्र की बू आती है।
ज्ञापन में कहा गया कि गिरफ्तारी की कार्यवाही संदेहास्पद है। अध्यक्ष निर्दोष हैं और उन्हें षड्यंत्र का शिकार बनाया गया है। मामले की जांच किसी निष्पक्ष वरिष्ठ अधिकारी से कराई जाए। बलरामकांत साहू के खिलाफ दर्ज फर्जी प्रकरण को समाप्त किया जाए।
अब सवाल यह है कि पुलिस इस प्रकरण में क्या रुख अपनाती है। नगर पंचायत अध्यक्ष के समर्थन में बढ़ती आवाज़ों ने इस मामले को राजनीतिक और सामाजिक दोनों स्तर पर गरमा दिया है। अगर निष्पक्ष जांच होती है तो यह साफ हो जाएगा कि बलरामकांत साहू की गिरफ्तारी वास्तविक अपराध के कारण हुई या किसी साजिश का हिस्सा थी।


