Tuesday, 29 Sep 2026

शेयर बाजार में ज्यादा मुनाफे का झांसा देकर 6.80 लाख की साइबर ठगी

महासमुंद साइबर पुलिस ने इंदौर से दो आरोपियों को पकड़ा, फर्जी पहचान से करते थे फोन, छह मोबाइल जब्त

महासमुंद। शेयर मार्केट में ट्रेडिंग के नाम पर अधिक मुनाफे का लालच देकर 6 लाख 80 हजार रुपये की साइबर ठगी करने वाले गिरोह का महासमुंद साइबर पुलिस ने पर्दाफाश किया है। पुलिस ने मामले में मध्यप्रदेश के इंदौर से दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों पर फर्जी पहचान और सिम का इस्तेमाल कर शेयर मार्केट में निवेश के नाम पर रकम ठगने का आरोप है। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से छह मोबाइल फोन जब्त किए हैं।

पुलिस के अनुसार महासमुंद के नेहरू चौक निवासी मेहुल लुनिया ने साइबर थाना महासमुंद में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत के मुताबिक 2 फरवरी 2026 को मोबाइल नंबर से विश्वजीत नाम के व्यक्ति ने फोन कर शेयर मार्केट ट्रेडिंग से जुड़ी जानकारी दी और अधिक लाभ का भरोसा दिलाया। इसके बाद अलग-अलग लोगों ने उससे संपर्क किया और फॉरेक्स व शेयर ट्रेडिंग के नाम पर निवेश करने के लिए प्रेरित किया।

शिकायतकर्ता के मुताबिक शुरुआत में उसके डीमैट खाते से ट्रेडिंग के जरिए नुकसान कराया गया। इसके बाद आरोपियों ने अलग-अलग बैंक खातों में रकम जमा कराने के लिए कहा। पीड़ित ने विभिन्न खातों में रकम जमा की। इसी दौरान उसे मुनाफे के तौर पर 12,845 रुपये की राशि भी भेजी गई, जिससे उसका भरोसा बढ़ाया गया। बाद में लगातार और रकम निवेश करने के लिए कहा गया। पीड़ित के अनुसार उसने अलग-अलग बैंक खातों में कुल 6 लाख 80 हजार रुपये जमा किए, लेकिन अपेक्षित मुनाफा नहीं मिला। रकम वापस मांगने पर भी संतोषजनक जवाब नहीं दिया गया। इसके बाद उसे ठगी का एहसास हुआ और उसने साइबर थाने में शिकायत दर्ज कराई।

पुलिस ने मामले में 12 मार्च 2026 को साइबर थाना महासमुंद में अपराध क्रमांक 01/2026 के तहत धारा 318(4) बीएनएस और 66डी आईटी एक्ट में अपराध दर्ज कर जांच शुरू की। जांच के दौरान संदिग्ध मोबाइल नंबरों की कॉल डिटेल और अन्य तकनीकी जानकारी जुटाई गई। जांच में आरोपी ऋषि राठौर और जितेन्द्र शर्मा का लोकेशन इंदौर में मिला। इसके बाद महासमुंद साइबर पुलिस की टीम ने इंदौर पहुंचकर दोनों आरोपियों को पकड़ा और पूछताछ की। पुलिस के अनुसार पूछताछ में आरोपियों ने ठगी की घटना में शामिल होना स्वीकार किया।

पुलिस के मुताबिक आरोपी इंदौर के अपोलो ट्रेड सेंटर में केपिटल रिसर्च नाम की कंपनी में क्लाइंट को कॉल करने और शेयर बाजार में ट्रेडिंग से संबंधित जानकारी देने का काम करते थे। इसी दौरान दोनों ने पीड़ित से संपर्क किया। पुलिस का आरोप है कि ऋषि राठौर ने हर्ष भारद्वाज और देवांगन सर, जबकि जितेन्द्र शर्मा ने विश्वजीत शर्मा के नाम से अपनी पहचान छिपाकर पीड़ित से बातचीत की।

पुलिस के अनुसार आरोपियों ने फर्जी सिम का इस्तेमाल कर पीड़ित से संपर्क किया और अलग-अलग बैंक खातों में रकम जमा कराई। जांच में ऋषि राठौर के खाते में करीब 2.50 लाख रुपये, जितेन्द्र शर्मा के बैंक ऑफ इंडिया खाते में करीब 2.90 लाख रुपये और सीहोर निवासी अनिकेत शर्मा के एक्सिस बैंक खाते में करीब 1.02 लाख रुपये जमा कराए जाने की जानकारी सामने आई है। इसके अलावा छोटी-छोटी रकम भी खातों में जमा कराई गई। पुलिस ने आरोपी ऋषि राठौर के कब्जे से चार मोबाइल फोन और जितेन्द्र शर्मा के कब्जे से दो मोबाइल फोन जब्त किए हैं। पुलिस इन मोबाइलों से साइबर ठगी से जुड़े अन्य संपर्कों और लेन-देन की जानकारी जुटा रही है।

दोनों आरोपियों को 22 सितंबर 2026 को गिरफ्तार किया गया। इंदौर के न्यायिक मजिस्ट्रेट से ट्रांजिट रिमांड प्राप्त करने के बाद आरोपियों को मामले में आगे की कार्रवाई के लिए लाया गया। जांच के दौरान फर्जी सिम के जरिए पहचान छिपाकर दोनों आरोपियों द्वारा योजना बनाकर ठगी करने के आरोप में धारा 61(2) बीएनएस भी जोड़ी गई है। पुलिस के अनुसार मामले में आरोपियों को फर्जी सिम उपलब्ध कराने वाले व्यक्ति हिमांशु दुबे की भी तलाश की जा रही है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस नेटवर्क में और कितने लोग शामिल हैं और आरोपियों ने इसी तरीके से अन्य लोगों को भी अपना शिकार बनाया है।

 

 

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