Thursday, 28 May 2026

यूरिया वितरण में गड़बड़ी पर बड़ी कार्रवाई, कृषि विभाग के दो अधिकारी निलंबित

महासमुंद। जिले में यूरिया खाद के अनियमित वितरण को लेकर आखिरकार प्रशासन ने सख्त कदम उठाया है। कलेक्टर ने कृषि विभाग के दो वरिष्ठ अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। यह कार्रवाई उस समय हुई है जब किसानों के बीच लंबे समय से खाद वितरण में मनमानी, कालाबाजारी और विभागीय लापरवाही की शिकायतें लगातार सामने आ रही थीं।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, कार्यालय उप संचालक कृषि महासमुंद के अधीन कार्यरत वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी सरायपाली श्री सुंदरलाल मिर्धा तथा प्रभारी वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी बागबाहरा श्री गंगा प्रसाद शरणागत पर अक्रियाशील फसल अवधि में नियमों के विपरीत अधिक मात्रा में यूरिया खाद वितरण कराने का आरोप है। बताया जा रहा है कि संबंधित अधिकारियों को विभागीय स्तर पर पहले भी निर्देश दिए गए थे, लेकिन उन्होंने न तो वितरण पर नियंत्रण किया और न ही संबंधित दुकानदारों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई की।

सरायपाली क्षेत्र में मेसर्स राजेश अग्रवाल एवं मेसर्स ओम फर्टिलाइजर द्वारा बड़े पैमाने पर यूरिया वितरण की शिकायतें मिली थीं। वहीं बागबाहरा क्षेत्र में मेसर्स आर.एस. ट्रेडर्स एवं जय मां भीमेश्वरी ट्रेडर्स सुनसुनिया के माध्यम से अनियमित वितरण का मामला सामने आया। किसानों का आरोप है कि कृषि विभाग की मिलीभगत के बिना इतनी बड़ी मात्रा में खाद वितरण संभव नहीं था।

जिले में पहले से ही किसान खाद संकट, महंगे दाम और समय पर उपलब्धता की समस्या से परेशान हैं। ऐसे में विभागीय अधिकारियों की लापरवाही ने पूरे कृषि तंत्र पर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में यह चर्चा भी तेज है कि खाद वितरण व्यवस्था में लंबे समय से पारदर्शिता का अभाव रहा है और जिम्मेदार अधिकारी केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित रहे।

कलेक्टर द्वारा जारी आदेश में दोनों अधिकारियों को छत्तीसगढ़ सिविल सेवा आचरण नियम 1965 के प्रावधानों के तहत निलंबित किया गया है। निलंबन अवधि में गंगा प्रसाद शरणागत का मुख्यालय अनुविभागीय कृषि अधिकारी कार्यालय सरायपाली तथा सुंदरलाल मिर्धा का मुख्यालय अनुविभागीय कृषि अधिकारी कार्यालय महासमुंद निर्धारित किया गया है। दोनों को नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता मिलेगा।

प्रशासन की इस कार्रवाई को कृषि विभाग में लंबे समय बाद हुई बड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई माना जा रहा है। अब सवाल यह है कि केवल निलंबन से व्यवस्था सुधरेगी या खाद वितरण में सक्रिय पूरी श्रृंखला पर भी जांच की जाएगी।

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