Saturday, 7 Mar 2026

परियोजना अधिकारी गुरूर का तुगलकी फरमान, खराब गुणवत्ता की पारदर्शी साड़ी पहनो, वरना वेतन काट लेंगे!

आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की गरिमा पर हमला!

बालोद जिले में आक्रोश की लहर, पूरे छत्तीसगढ़ में फैल सकता है आंदोलन

गुरूर (बालोद)। एकीकृत बाल विकास परियोजना गुरूर की परियोजना अधिकारी द्वारा जारी पत्र (प.क्र./39 स्था० /मबावि/2025-26, दिनांक 20/02/2026) ने आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं में भारी रोष पैदा कर दिया है। पत्र में साफ कहा गया है कि सोमवार (23 फरवरी 2026) और मंगलवार (24 फरवरी 2026) को निर्धारित समय पर गणवेश (यूनिफॉर्म) प्राप्त न करने पर इस माह का वेतन रोक दिया जाएगा। कार्यकर्ता स्वयं इसके लिए जिम्मेदार होंगी।

यह पत्र हिटलरशाही और तुगलकी फरमान से कम नहीं है, जबकि पूरे छत्तीसगढ़ में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता शासन द्वारा दी जा रही साड़ी घटिया गुणवत्ता का विरोध कर रही हैं। साड़ी इतनी पारदर्शी और निम्न स्तर की है कि पहनने पर अंतःवस्त्र दिखाई देते हैं, जिससे महिलाओं की गरिमा और लज्जा भंग होती है। कार्यकर्ताओं ने कभी यूनिफॉर्म पहनने से इनकार नहीं किया, बल्कि मांग की है कि ड्रेस सम्मानजनक और अच्छी गुणवत्ता की हो।

छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों जैसे बलौदा बाजार, दुर्ग, धमतरी, महासमुंद, बिलासपुर, मुंगेली, सूरजपुर आदि में पहले से ही ऐसी घटिया साड़ियों के खिलाफ विरोध हो चुका है। कार्यकर्ताओं ने महिला एवं बाल विकास विभाग के सचिव और मंत्री से मिलकर गुणवत्तापूर्ण ड्रेस की मांग की थी। हाल ही में बलौदा बाजार में कार्यकर्ताओं ने खराब साड़ियों के विरोध में ऐप-आधारित सिस्टम का भी बहिष्कार किया।

भ्रष्टाचार की आंच पर तेल  एक तरफ ड्रेस खरीद में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार के आरोप लग रहे हैं, जिससे घटिया सामग्री आ रही है। दूसरी तरफ परियोजना अधिकारी गुरूर द्वारा वेतन काटने की धमकी देकर कार्यकर्ताओं को मजबूर करने की कोशिश की जा रही है। यह महिलाओं के सम्मान पर सीधा हमला है।

कार्यकर्ताओं की चेतावनी  यदि परियोजना अधिकारी ने वेतन काटने का दुस्साहस किया, तो पूरे प्रदेश में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता- सहायिकाओं का जोरदार आंदोलन छिड़ जाएगा। वे सिविल ड्रेस में ही ड्यूटी करेंगी और विभाग के खिलाफ सड़कों पर उतरेंगी।

सवाल उठते हैं  क्या महिला एवं बाल विकास विभाग महिलाओं की गरिमा की रक्षा करने वाला है या अपमान का माध्यम? भ्रष्टाचार से मिली घटिया ड्रेस पर करोड़ों खर्च कर प्रदेश की माताओं-बहनों को अपमानित क्यों किया जा रहा है? परियोजना अधिकारी का यह फरमान शासन की नीति है या व्यक्तिगत मनमानी?

आंगनबाड़ी कार्यकर्ताएं, जो बच्चों और महिलाओं की सेवा में दिन-रात जुटी रहती हैं, अब खुद असम्मान का शिकार हो रही हैं। शासन को तत्काल हस्तक्षेप कर गुणवत्तापूर्ण यूनिफॉर्म सुनिश्चित करना चाहिए, अन्यथा प्रदेशव्यापी आंदोलन अनिवार्य हो जाएगा।

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