महासमुंद। जिले के श्याम बालाजी महाविद्यालय में बी.एड कोर्स को लेकर अवैध फीस वसूली, आर्थिक शोषण और शैक्षणिक अनियमितताओं का मामला अब गंभीर रूप ले चुका है। स्थानीय जांच समिति की रिपोर्ट में आरोपों की पुष्टि होने के बाद विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) ने सख्त रुख अपनाते हुए कॉलेज प्रबंधन से 7 दिनों के भीतर जवाब और अनुपालन रिपोर्ट मांगी है।
जांच समिति, जिसका गठन शासकीय महाप्रभु वल्लभाचार्य स्नातकोत्तर महाविद्यालय द्वारा किया गया था, ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट किया है कि राज्य शासन द्वारा निर्धारित ₹30,970 वार्षिक फीस के बावजूद कॉलेज छात्रों से ₹51,000 तक वसूल रहा था। इसमें ₹20,000 नकद बिना रसीद के लेने का मामला सामने आया है। आय-व्यय रिपोर्ट में भी इस अतिरिक्त राशि का कोई उल्लेख नहीं मिलने से वित्तीय गड़बड़ी की पुष्टि हुई है।
रिपोर्ट में यह भी खुलासा हुआ है कि “नॉन-अटेंडेंस” के नाम पर छात्रों से प्रति सेमेस्टर ₹25,000, कम उपस्थिति पर प्रति प्रतिशत ₹250, तथा अन्य मदों जैसे गमला, सीसीटीवी, मॉडल आदि के नाम पर भी अतिरिक्त शुल्क लिया जा रहा था। यहां तक कि इंटर्नशिप में नहीं जाने वाले छात्रों से भी ₹5,000 अतिरिक्त वसूले जाने की बात सामने आई है।
जांच के दौरान 100 में से केवल 47 छात्र उपस्थित पाए गए, जबकि 53 अनुपस्थित थे। पूछताछ में कई छात्रों ने बताया कि उन्हें सिर्फ ₹31,000 की रसीद दी गई, जबकि शेष ₹20,000 नकद लिया गया। कुछ छात्रों ने नाम गोपनीय रखने की शर्त पर आर्थिक शोषण और विरोध करने पर परेशान किए जाने का आरोप लगाया।
शैक्षणिक स्तर पर भी गड़बड़ी सामने आई है। रिपोर्ट के अनुसार अधिकांश छात्रों को आंतरिक परीक्षाओं में 98-99 अंक दिए गए, जबकि शिकायतकर्ता छात्रा को असामान्य रूप से कम अंक दिए गए। इससे शैक्षणिक प्रतिशोध की आशंका जताई गई है।
UGC की फीस निवारण सेल ने इस पूरे मामले को गंभीर मानते हुए कॉलेज को निर्देश दिया है कि: सभी प्रभावित छात्रों को अतिरिक्त वसूली गई राशि लौटाई जाए, शिकायतकर्ता के शैक्षणिक रिकॉर्ड में सुधार किया जाए। वित्तीय अनियमितताओं पर लिखित स्पष्टीकरण दिया जाए और 7 दिनों के भीतर विस्तृत अनुपालन रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए। UGC ने चेतावनी दी है कि निर्धारित समय में कार्रवाई नहीं होने पर कॉलेज की मान्यता समाप्त करने, आर्थिक दंड और आपराधिक कार्रवाई की अनुशंसा की जा सकती है।
इस पूरे घटनाक्रम के बाद जिले में निजी शिक्षण संस्थानों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। अब निगाहें प्रशासन और UGC की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं।


