Thursday, 22 Oct 2026

सिरपुर यूनेस्को की विश्व धरोहर की अस्थायी सूची में शामिल

महानदी तट की ऐतिहासिक नगरी श्रीपुर की प्राचीन विरासत को मिली अंतरराष्ट्रीय पहचान की दिशा में अहम उपलब्धि

महासमुंद। छत्तीसगढ़ की ऐतिहासिक और पुरातात्विक धरोहर सिरपुर को यूनेस्को की विश्व धरोहर की अस्थायी सूची में शामिल किया गया है। इससे महानदी के तट पर स्थित इस प्राचीन नगरी को वैश्विक पहचान दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बढ़ा है। जिला प्रशासन के अनुसार, यूनेस्को की आधिकारिक वेबसाइट पर सिरपुर को सूचीबद्ध किया गया है।

प्राचीन काल में श्रीपुर के नाम से विख्यात सिरपुर, पांडुवंशी शासकों के समय दक्षिण कोसल की राजधानी रहा है। यह क्षेत्र अपनी समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा, मंदिर स्थापत्य, बौद्ध विहारों और दुर्लभ पुरातात्विक अवशेषों के लिए जाना जाता है। यहां शैव, वैष्णव, बौद्ध और जैन परंपराओं से जुड़ी ऐतिहासिक धरोहरें एक साथ देखने को मिलती हैं।

सिरपुर का प्रसिद्ध लक्ष्मण मंदिर ईंटों से निर्मित प्राचीन मंदिर स्थापत्य का उत्कृष्ट उदाहरण है। लगभग सातवीं शताब्दी में निर्मित इस मंदिर का निर्माण महाशिवगुप्त बालार्जुन की माता वासटा ने अपने पति हर्षगुप्त की स्मृति में कराया था। महानदी के तट पर स्थित गंधेश्वर मंदिर भी धार्मिक और ऐतिहासिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है।

यहां उत्खनन में आनंदप्रभु कुटी विहार, स्वास्तिक विहार और तीवरदेव महाविहार जैसे बौद्ध स्थापत्य अवशेष सामने आए हैं। बुद्ध की भूमिस्पर्श मुद्रा वाली प्रतिमाओं सहित अनेक दुर्लभ प्रतिमाएं, धातु कलाकृतियां, सिक्के, आभूषण निर्माण के उपकरण और दैनिक उपयोग की वस्तुएं सिरपुर के गौरवशाली अतीत की जानकारी देती हैं। पुरातात्विक साक्ष्य बताते हैं कि यह क्षेत्र प्राचीन काल में धार्मिक, सांस्कृतिक और कला गतिविधियों का महत्वपूर्ण केंद्र था।

कलेक्टर विनय कुमार लंगेह ने सिरपुर को यूनेस्को की संभावित विश्व धरोहर सूची में शामिल किए जाने की जानकारी दी। उल्लेखनीय है कि केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने 1 जनवरी 2026 को सिरपुर के पुरातात्विक स्थलों का अवलोकन किया था। उस दौरान उन्होंने इस ऐतिहासिक धरोहर के संरक्षण और संवर्धन तथा इसे यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल कराने के लिए प्राथमिकता से प्रयास करने की बात कही थी।

अस्थायी सूची में शामिल होना सिरपुर की वैश्विक पहचान की दिशा में महत्वपूर्ण पड़ाव है। हालांकि, इसे यूनेस्को की अंतिम विश्व धरोहर सूची में शामिल करने के लिए आगे की प्रक्रिया पूरी होना बाकी है। इससे भविष्य में सिरपुर के संरक्षण, शोध और पर्यटन विकास को नई दिशा मिलने की उम्मीद है।

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