Wednesday, 10 Jun 2026

सचिव रीमन ध्रुव की मनमानी से ग्रामीणों में आक्रोश, 17 साल से एक ही जगह पर स्थापित 

महासमुंद। ब्लॉक के ग्राम पंचायत जलकी के ग्रामीण पिछले कई वर्षों से ग्राम पंचायत सचिव रीमन ध्रुव के गैर-जिम्मेदाराना रवैये से परेशान हैं। करीब 17 वर्षों से एक ही पंचायत में जमे सचिव पर ग्रामीणों का आरोप है कि वे पंचायत को अपनी निजी जागीर समझती हैं। जब मन होता है तब कार्यालय आती हैं, नहीं तो महीनों गायब रहती हैं।

ग्रामीण बताते हैं कि आय, जाति, निवास प्रमाण-पत्र बनवाने के लिए लोग सुबह से शाम तक सचिव का इंतजार करते रहते हैं, लेकिन सचिव महोदया नहीं आतीं। विधवा, वृद्धा और परित्यक्ता महिलाओं की पेंशन महीनों से रुकी हुई है। ग्राम सभा तक आयोजित नहीं हो रही है। बच्चों का आधार कार्ड, छात्रवृत्ति फॉर्म, राशन कार्ड सुधार जैसे छोटे-छोटे काम भी लटके पड़े हैं।

ग्रामीणों ने गंभीर आरोप लगाया है कि पिछले पंचवर्षीय कार्यकाल (2015-2020) में तत्कालीन सरपंच ने मनरेगा व अन्य योजनाओं के लाखों रुपये निकाल लिए थे, लेकिन विकास कार्य नहीं हुए। यह बात सचिव रीमन ध्रुव को अच्छी तरह पता थी, फिर भी उन्होंने प्रशासन को सूचना नहीं दी। मामला तब खुला जब जिला कलेक्टर ने संज्ञान लिया और अभी सप्ताह भर पहले ही पुराने कार्यकाल के बचे हुए सीमेंट रोड व अन्य कार्य कराए गए। वर्तमान सरपंच ने सचिव के रवैये से तंग आकर जनपद पंचायत सरायपाली के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) से लिखित शिकायत की। लेकिन शिकायत के बाद तो सचिव महोदया ने ग्राम पंचायत जलकी आना ही बंद कर दिया। अब ग्रामीण पूरी तरह बेबस हैं।

गौरतलब है कि पंचायती राज अधिनियम और छत्तीसगढ़ पंचायत सचिव सेवा भर्ती एवं सेवा शर्तें नियम के अनुसार सचिव का मुख्यालय ग्राम पंचायत कार्यालय ही होता है। उसे प्रतिदिन निर्धारित समय पर उपस्थित रहना अनिवार्य है। सभी शासकीय योजनाओं का समयबद्ध क्रियान्वयन, पेंशन वितरण, प्रमाण-पत्र जारी करना, ग्राम सभा आयोजित करना उसकी मूल जिम्मेदारी है। किसी भी अनियमितता की सूचना तत्काल उच्चाधिकारी को देना बाध्यकारी है।

ग्रामीणों का कहना है कि जनपद CEO को सचिव रीमन ध्रुव को तुरंत निलंबित कर विभागीय जांच बैठानी चाहिए।  17 साल से एक ही जगह जमे होने के कारण स्थानांतरण नीति का उल्लंघन स्पष्ट है, अतः फौरन उनका तबादला करना चाहिए। ग्रामीणों की सभी लंबित पेंशन, प्रमाण-पत्र और अन्य कार्य 15 दिन में पूरे कराने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था करनी चाहिए। पिछले कार्यकाल के भ्रष्टाचार में सचिव की मिलीभगत की अलग से जांच कराई जाए। पंचायत के सभी रिकॉर्ड की ऑडिट कराकर दोषियों पर आपराधिक प्रकरण दर्ज करना चाहिए।

ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि अगर एक सप्ताह में सचिव पर कार्रवाई नहीं हुई तो वे जिला कलेक्टर कार्यालय के सामने धरना-प्रदर्शन करेंगे। अब देखना यह है कि जनपद पंचायत के CEO और जिला प्रशासन इस मामले में कितनी गंभीरता दिखाते हैं या फिर सचिव की मनमानी ऐसे ही चलती रहेगी।

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