Friday, 9 Oct 2026

क्यों रेंजर और डिप्टी रेंजर पर हुआ जानलेवा हमला…क्या थी वजह…

वनकर्मियों को घेरकर बेरहमी से पीटा, पंप हाउस में बनाया बंधक
50-60 ग्रामीणों ने रेंजर, डिप्टी रेंजर और चौकीदार को बनाया निशाना, देर रात पुलिस ने छुड़ाया

महासमुंद/बागबाहरा। वन क्षेत्र में गश्त और वन्यजीवों के शिकार की सूचना पर कार्रवाई करने पहुंचे वन विभाग के कर्मचारियों पर ग्रामीणों के एक बड़े समूह ने हमला कर दिया। तमोरा के वन कक्ष क्रमांक 95 और 96 में करीब 50 से 60 महिला-पुरुष ग्रामीणों ने वन विभाग के कर्मचारियों को घेरकर लात-घूंसे और लाठी-डंडों से जमकर पीटा। हमले में बागबाहरा के रेंजर नवीन वर्मा, डिप्टी रेंजर और एक वन चौकीदार घायल हो गए। मारपीट के बाद ग्रामीण तीनों को जंगल से निकालकर गांव की ओर ले गए और एक किसान के खेत में बने पंप हाउस में बंधक बनाकर रख दिया। देर रात करीब 12 बजे पुलिस और वन विभाग के अधिकारियों की टीम ने मशक्कत के बाद तीनों को ग्रामीणों के कब्जे से छुड़ाया।

जानकारी के अनुसार बुधवार शाम करीब 7 बजे बागबाहरा रेंजर नवीन वर्मा को सूचना मिली थी कि वन कक्ष क्रमांक 95-96 में कुछ लोगों द्वारा जंगली सूअर और अन्य वन्यजीवों का शिकार किया जा रहा है। सूचना के बाद करीब 7.30 बजे वन विभाग के 7-8 कर्मचारी तमोरा पहुंचे और जंगल के भीतर गश्त के लिए आगे बढ़े।

इसी दौरान जंगल में मौजूद 50-60 ग्रामीण महिला-पुरुष वनकर्मियों के पास पहुंच गए और उन्हें चारों ओर से घेर लिया। ग्रामीणों ने वनकर्मियों से जंगल में आने का कारण पूछा और कथित रूप से गाली-गलौज करते हुए विरोध शुरू कर दिया। स्थिति बिगड़ती देख कुछ वनकर्मी वहां से भाग निकले। इसी दौरान एक चौकीदार ग्रामीणों के हाथ लग गया, जबकि रेंजर नवीन वर्मा और डिप्टी रेंजर भी ग्रामीणों के बीच घिर गए।

आरोप है कि इसके बाद ग्रामीणों ने तीनों वनकर्मियों के साथ मारपीट शुरू कर दी। लाठी-डंडों, लात और घूंसों से उनकी पिटाई की गई। स्थिति इतनी तनावपूर्ण हो गई कि वनकर्मियों को अपनी जान का खतरा महसूस होने लगा। इसी बीच गांव का एक उपसरपंच मौके पर पहुंचा और ग्रामीणों को समझाने का प्रयास किया, जिसके बाद मारपीट बंद हुई। इसके बाद ग्रामीण तीनों वनकर्मियों को अपने साथ जंगल से बाहर गांव की ओर ले जाने लगे। रास्ते में एक किसान के खेत में बने पंप हाउस में तीनों को बंधक बना लिया गया। ग्रामीणों की मांग थी कि वन विभाग द्वारा पूर्व में कब्जामुक्त कराई गई जमीन वापस की जाए। इसी मांग को लेकर वन विभाग के अन्य अधिकारियों को मौके पर बुलाने की बात कही गई।

ढाई सौ एकड़ कब्जामुक्त कराने के बाद बढ़ा था विवाद
बताया जा रहा है कि मार्च-अप्रैल 2026 में वन विभाग ने तमोरा के कक्ष क्रमांक 95 और 96 में करीब 250 एकड़ वनभूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराने की कार्रवाई की थी। विभाग के अनुसार कुछ ग्रामीण वनभूमि पर कब्जा कर निवास कर रहे थे। अतिक्रमण हटाने के बाद क्षेत्र में करीब 56 हजार पौधों का रोपण किया गया। उस समय भी ग्रामीणों ने वन विभाग की कार्रवाई का विरोध किया था। कार्रवाई के दौरान करीब 50 परिवारों के खिलाफ वन अधिनियम के तहत प्रकरण दर्ज कर उन्हें जेल भेजे जाने की बात सामने आई है। बताया जा रहा है कि कार्रवाई के बाद से ही ग्रामीणों और वन विभाग के बीच तनाव बना हुआ था। क्षेत्र में कुछ ग्रामीणों द्वारा अब भी वनभूमि पर कब्जा किए जाने की बात कही जा रही है। बुधवार रात हुई हिंसक घटना को इसी पुराने विवाद की परिणति माना जा रहा है।

जान बचाकर भागे कर्मचारियों ने दी सूचना
जंगल से किसी तरह निकलकर भागे वनकर्मियों ने घटना की सूचना खल्लारी पुलिस और वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को दी। सूचना मिलते ही पुलिस टीम और वन विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचे। ग्रामीणों से बातचीत और काफी मशक्कत के बाद देर रात करीब 12 बजे रेंजर, डिप्टी रेंजर और चौकीदार को पंप हाउस से सुरक्षित बाहर निकाला गया। घटना के बाद क्षेत्र में तनाव की स्थिति बनी रही। वन विभाग के अधिकारियों की रिपोर्ट पर खल्लारी पुलिस ने मामले को जांच में लिया है। पुलिस अब मारपीट, बंधक बनाए जाने और घटना के पीछे के पूरे विवाद की जांच कर रही है। मामले में आगे आरोपियों की पहचान और उनके विरुद्ध कार्रवाई की जा रही है।

Share This Article

- Advertisement -

error: Content is protected !!