महासमुंद। जिला शिक्षा विभाग महासमुंद में पदोन्नति की अनियमितताओं पर बड़ी कार्यवाही की गई है। जिला शिक्षा अधिकारी विजय कुमार लहरे ने जांच उपरांत शिक्षकों की पूर्व में हुई पदोन्नतियां निरस्त कर उन्हें पुनः सहायक शिक्षक (एल.बी.) पद पर पदावनत कर दिया है। पदावनति पाने वाले शिक्षकों में सतीश कुमार ध्रुवेल – वर्ष 2007 में नियुक्ति के बाद 2017 में आपसी स्थानांतरण से बागबाहरा आए। नियमानुसार उनकी नई वरिष्ठता 05.04.2017 से मानी जानी चाहिए थी, लेकिन बीईओ कार्यालय ने 2007 की वरिष्ठता दर्शाकर पदोन्नति प्रस्तावित कर दी। जांच में गड़बड़ी पकड़ी गई और पदोन्नति रद्द कर दी गई। नारायण सिदार – वर्ष 2007 में बलौदाबाजार में नियुक्ति, 2012 में पिथौरा स्थानांतरण। वरिष्ठता 12.09.2012 से मान्य होनी थी, पर बीईओ ने गलत वरिष्ठता के आधार पर प्रधानपाठक बना दिया। अब आदेश निरस्त। ईश्वर लाल दीवान – 2007 में सरायपाली में नियुक्ति, 2012 में बागबाहरा स्थानांतरण। वरिष्ठता 05.10.2012 से मान्य थी, लेकिन पुरानी तिथि पर पदोन्नति दिला दी गई। जांच के बाद अब इन्हें भी पदावनत कर दिया गया। श्रीमती गौरी नायक, इनके मामले में भी स्थानांतरण के बाद वरिष्ठता गलत तरीके से जोड़ी गई और प्रधानपाठक पद पर पदोन्नति मिली। जांच के बाद पदावनति आदेश जारी। जिला शिक्षा अधिकारी के कार्रवाई के बाद अब बीईओ की भूमिका पर सवाल खड़ा किया जा रहा है।
गौरतलब है कि इन सभी पदोन्नति प्रकरणों में एक समान पैटर्न सामने आया है। आपसी स्थानांतरण के बाद नई वरिष्ठता से गणना होना चाहिए था। इसके बजाय बीईओ कार्यालय ने जानबूझकर या लापरवाहीवश पुरानी वरिष्ठता को दर्ज कर पदोन्नति प्रस्तावित की।
जिला स्तर की जांच में यह गड़बड़ी साबित हुई, जिसके बाद डीईओ ने आदेश निरस्त किए हैं।महासमुंद जिले शिक्षक जगत में सवाल यह उठ रहा है कि आखिर बीईओ कार्यालय ने ऐसे गलत प्रस्ताव कैसे भेजे? क्या यह केवल लापरवाही थी या फिर जानबूझकर की गई अनियमितता? यदि शिकायत न होती तो क्या ये सभी शिक्षक गलत वरिष्ठता के आधार पर आगे भी पदोन्नति का लाभ उठाते रहते?
डीईओ विजय कुमार लहरे ने आदेश जारी करते हुए स्पष्ट कहा है कि “वरिष्ठता और पदोन्नति प्रक्रिया में किसी प्रकार की हेराफेरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। नियम विरुद्ध दी गई सभी पदोन्नतियां निरस्त की जा रही हैं। भविष्य में भी यदि ऐसी कोई अनियमितता सामने आती है तो कड़ी कार्रवाई की जाएगी।”
महासमुंद जिले में शिक्षा विभाग की इस सख्त कार्यवाही से जहां कई शिक्षक पदावनत हुए हैं, वहीं पूरे जिले में शिक्षा अधिकारियों और बीईओ कार्यालयों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। शिक्षा विभाग में हड़कंप मची हुई है। डीईओ विजय लहरे ने सतीश ध्रुवेल, नारायण सिदार, ईश्वर दीवान व गौरी नायक की पदोन्नति रद्द कर दी है।


