बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने एक अहम फैसले में अपोलो हॉस्पिटल के चार डॉक्टरों को बड़ी राहत दी है। कोर्ट ने उनके खिलाफ दर्ज एफआईआर और निचली अदालत में पेश चार्जशीट को निरस्त कर दिया है।
यह मामला वर्ष 2016 का है, जब अपोलो हॉस्पिटल में भर्ती दयालबंद निवासी एक युवक की इलाज के दौरान मौत हो गई थी। परिजनों ने डॉक्टरों पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए सरकंडा थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इस पर पुलिस ने डॉक्टरों के खिलाफ आईपीसी की धारा 304A (गैर इरादतन हत्या) और 201 (सबूत मिटाने) के तहत अपराध दर्ज किया था।
मामले में चार डॉक्टर, डॉ. सुनील कुमार केडिया, डॉ. देवेंद्र सिंह, डॉ. राजीव लोचन भांजा और डॉ. मनोज कुमार राय ने सीनियर एडवोकेट सुनील ओटवानी के माध्यम से हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी।
याचिकाकर्ताओं की ओर से बताया गया कि मरीज को 25 दिसंबर 2016 को गंभीर हालत में भर्ती कराया गया था और अगले दिन 26 दिसंबर को उसकी मृत्यु हो गई थी। पोस्टमॉर्टम के बाद विसरा जांच रिपोर्ट में किसी भी प्रकार के सल्फास या जहरीले पदार्थ के अवशेष नहीं पाए गए थे।
इस मामले में पहले सिम्स और बाद में राज्य मेडिकल बोर्ड का गठन किया गया था। कार्डियोलॉजिस्ट समेत पांच विशेषज्ञ डॉक्टरों की समिति ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट किया था कि इलाज में किसी प्रकार की लापरवाही नहीं हुई। इसके बावजूद, पुलिस ने एक मेडिको लीगल विशेषज्ञ की रिपोर्ट के आधार पर मामला दर्ज कर लिया था। इस रिपोर्ट में तकनीकी कमियों का उल्लेख किया गया था, लेकिन यह स्पष्ट नहीं किया गया कि इन कमियों का मरीज की मौत से कोई सीधा संबंध था।
चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस बी.डी. गुरु की डिवीजन बेंच ने सुनवाई के बाद कहा कि केस न्यायसंगत नहीं है और डॉक्टरों के खिलाफ लापरवाही का आरोप साबित नहीं होता। कोर्ट ने एफआईआर और चार्जशीट दोनों को रद्द कर दिया। अंततः सात साल पुराने इस मामले में चारों डॉक्टरों को पूरी राहत मिल गई है।


