Saturday, 7 Mar 2026

SECL कर्मी दीनदयाल गुप्ता पर ठगी, शोषण और फर्जी पहचान का आरोप, गिरफ्तारी न होने पर युवती की आत्मदाह की चेतावनी

कोरबा। SECL के पंप ऑपरेटर दीनदयाल गुप्ता पर नौकरी लगाने का झांसा देकर ठगी, शोषण की कोशिश और झूठी पहचान का इस्तेमाल करने जैसे गंभीर आरोप लगे हैं। पीड़िता की शिकायत पर बाकीमोंगरा थाना पुलिस ने BNS की धारा 318(4) और 74 के तहत अपराध दर्ज किया है। लेकिन आरोपी की अब तक गिरफ्तारी नहीं होने से मामला और विवादों में घिर गया है।

पीड़िता ने IG बिलासपुर रेंज से मिलकर सुरक्षा की मांग की है। युवती ने सोशल मीडिया में वीडियो जारी कर चेतावनी दी है कि यदि एक सप्ताह में दीनदयाल की गिरफ्तारी नहीं हुई तो वह IG ऑफिस के सामने आत्मदाह कर लेगी। इस बयान के बाद पुलिस प्रशासन में खलबली मच गई है।

घटना मार्च 2025 से जुड़ी है। आरोप है कि दीनदयाल गुप्ता ने युवती को SECL में नौकरी लगवाने का लालच देकर 5 लाख रुपये मांगे। युवती ने अपनी जमीन गिरवी रखकर 2 लाख रुपये नकद दे दिए। न नौकरी लगी और न पैसे वापस मिले। इसके उलट आरोपी ने 3 लाख रुपये और देने का दबाव बनाया।

पीड़िता का आरोप है कि पैसे मांगने पर दीनदयाल ने उसे अपने क्वार्टर DQ-M-8 बलगी कॉलोनी बुलाया और एक रात साथ बिताने का प्रस्ताव दिया। विरोध करने पर उसने जबरदस्ती की कोशिश की। युवती ने इसकी शिकायत SP कोरबा से की, जिसके बाद FIR दर्ज की गई। हालांकि गिरफ्तारी न होने पर थाना स्टाफ की कार्यशैली पर सवाल उठ रहे हैं।

पीड़िता ने यह भी आरोप लगाया है कि दीनदयाल गुप्ता और उसका बेटा केस वापस लेने का दबाव बना रहे हैं। यहां तक कि थाना स्टाफ द्वारा भी उस पर समझौते का दबाव डाला गया। एक कर्मचारी द्वारा निजी नंबर से फोन कर धमकी दिए जाने का भी आरोप लगाया गया है। पीड़िता ने कहा है कि कॉल डिटेल की जांच की जाए तो कई पुलिसकर्मियों की मिलीभगत सामने आ जाएगी।

इधर, पूरे प्रकरण में अब एक नया खुलासा हुआ है। पीड़िता द्वारा प्रस्तुत दस्तावेज़ों और ग्रामीणों के बयान के अनुसार, दीनदयाल ने SECL में नौकरी पाने के लिए अपने पिता का नाम “समारू” बताया था। लेकिन ग्राम चैनपुर दीपिका निवासी समारू के तीन वास्तविक पुत्र—गेंदराम, संतराम और बहोरन हैं, जिनमें दीनदयाल का नाम शामिल नहीं है।

दीनदयाल ने पुलिस को दिए अपने बयान में भी पिता का नाम समारू लिखा है, जिससे आरोप और मजबूत हो गए हैं कि उसने फर्जी पिता का नाम बताकर SECL में नौकरी हासिल की हो सकती है। यदि यह साबित होता है तो पूरा मामला नियुक्ति धोखाधड़ी और जालसाजी की श्रेणी में आ सकता है। ग्रामीणों ने SECL प्रबंधन से दीनदयाल की सर्विस बुक और नियुक्ति दस्तावेज़ों की जांच की मांग की है।

ग्रामीणों का आरोप है कि आरोपी खुलेआम घूम रहा है और पुलिस कार्रवाई करने के बजाय समझौते का दबाव बना रही है। उनका कहना है कि गरीब होता तो पुलिस उसी दिन गिरफ़्तार कर लेती। ग्रामीणों ने सवाल उठाया—“आखिर कितने में बिके होंगे पुलिस अधिकारी-कर्मचारी?”

उधर, SP सिद्धार्थ तिवारी ने कहा है कि महिला से जुड़े अपराधों में सख्त कार्रवाई की जाएगी और जांच निष्पक्ष होगी। उन्होंने बताया कि कानून के अनुसार गिरफ्तारी के लिए 60 दिन का समय है हालांकि सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं का सवाल है कि इतने गंभीर मामले में तुरंत कार्रवाई क्यों नहीं की गई। फर्जी पहचान, ठगी, शोषण की कोशिश और पुलिस पर दबाव जैसे आरोपों के कारण मामला बेहद संवेदनशील हो चुका है। अब सबकी निगाहें SP कोरबा और SECL प्रबंधन पर हैं कि वे कब और क्या ठोस कदम उठाते हैं।

पीड़िता

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