महासमुंद। अखिल भारतीय कांग्रेस पार्टी के आह्वान पर आज देशभर में एकदिवसीय उपवास का आयोजन किया गया। यह आंदोलन भारतीय जनता पार्टी सरकार द्वारा महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) के नाम व स्वरूप में कथित बदलाव, 100 दिन की रोजगार गारंटी को कमजोर करने तथा राज्यों पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ डालने के निर्णय के विरोध में किया गया।
महासमुंद जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष द्वारिकाधीश यादव के नेतृत्व में जिले में यह उपवास कार्यक्रम आयोजित हुआ। कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार मनरेगा जैसी जनकल्याणकारी योजना को धीरे-धीरे समाप्त करने की दिशा में कदम बढ़ा रही है, जिससे देश के गरीब, मजदूर और ग्रामीण वर्ग के अधिकारों पर सीधा हमला हो रहा है।
कांग्रेस का कहना है कि मनरेगा का मूल उद्देश्य ग्रामीण गरीबों को वर्ष में कम से कम 100 दिन का सुनिश्चित रोजगार देना था, लेकिन योजना के नाम और नियमों में बदलाव कर इसकी आत्मा को कमजोर किया जा रहा है। उपवास कर रहे नेताओं ने केंद्र सरकार पर यह भी आरोप लगाया कि राज्यों से 40 प्रतिशत अनुदान की शर्त लगाकर योजना को अव्यवहारिक बनाया जा रहा है, जिससे रोजगार उपलब्ध कराना मुश्किल होगा।
वक्ताओं ने महात्मा गांधी के नाम को योजना से हटाने के प्रयास पर कड़ा विरोध जताते हुए कहा कि गांधी जी का नाम सामाजिक न्याय, श्रम की गरिमा और गरीबों के अधिकारों का प्रतीक है। इसे हटाना देश की संवैधानिक और नैतिक परंपराओं के खिलाफ है।
कांग्रेस ने मांग की कि मनरेगा के मूल नाम और स्वरूप को बहाल किया जाए, 100 दिन की रोजगार गारंटी को मजबूती से लागू किया जाए, राज्यों पर डाले गए अतिरिक्त वित्तीय बोझ को समाप्त किया जाए, योजना के लिए पर्याप्त बजट सुनिश्चित किया जाए तथा मजदूरी भुगतान में हो रही देरी तुरंत खत्म की जाए।
जिलाध्यक्ष द्वारिकाधीश यादव ने चेतावनी दी कि यदि केंद्र सरकार ने इन मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। उन्होंने कहा कि आज का एकदिवसीय उपवास देशव्यापी संघर्ष की शुरुआत है, जिसका उद्देश्य ग्रामीण गरीबों के रोजगार अधिकार और महात्मा गांधी के विचारों की रक्षा करना है।
इस अवसर पर विधायक सरायपाली चतुरीनंद सहित कांग्रेस के वरिष्ठ नेता, पदाधिकारी, महिला मोर्चा, युवक कांग्रेस के कार्यकर्ता एवं बड़ी संख्या में कांग्रेसजन उपवास में शामिल रहे।



