मार्च में नहीं मिला अनाज, 593 दुकानों में हाहाकार, अधिकारी बेखबर या बेपरवाह?
महासमुंद | जिले में खाद्य नागरिक आपूर्ति निगम (नान) की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में है। मार्च माह में जिले के लाखों हितग्राही सरकारी राशन से वंचित रह गए, जबकि कागजों में योजनाएं पूरी रफ्तार से चलती रहीं। ग्रामीणों का कहना है कि जिले की सैकड़ों राशन दुकानों में मार्च माह का अनाज पहुंचा ही नहीं। परिणामस्वरूप हितग्राही पूरे महीने खाली हाथ लौटते रहे और उन्हें उधार लेकर अपना गुजारा करना पड़ा।
गौरतलब है कि जिले में 593 सरकारी उचित मूल्य दुकानों का नेटवर्क है, लेकिन इनमें से सैकड़ों दुकानों तक राशन नहीं पहुंचा। वहीं लगभग 375 दुकानों में शक्कर की आपूर्ति भी नहीं हो सकी, जिससे स्थिति और गंभीर हो गई। यह कोई पहली बार नहीं है जब नान की लापरवाही सामने आई हो। इससे पहले भी कई दुकानों में घटिया और बदबूदार चावल भेजे जाने के मामले सामने आए हैं, जहां राशन दुकान संचालकों पर वितरण का दबाव बनाया गया। इन मामलों की शिकायतें जिला प्रशासन तक पहुंची, लेकिन सुधार के संकेत नहीं दिखे।
सरकार जहां मुफ्त राशन योजना का प्रचार-प्रसार कर अपनी उपलब्धियां गिना रही है, वहीं जमीनी स्तर पर अधिकारी अपनी निष्क्रियता से इन योजनाओं को पलीता लगाने में लगे हैं। हालात यह हैं कि जिन गरीब परिवारों का जीवन सरकारी राशन पर निर्भर है, वे ही सबसे ज्यादा परेशान हैं।
खाद्य नागरिक आपूर्ति निगम (नान) के प्रबंधक की नैतिक जिम्मेदारी होती है कि राशन दुकानों में नियत समय पर भंडारण सुनिश्चित किया जाए, लेकिन महासमुंद जिले में यह व्यवस्था कभी भी सुचारु रूप से संचालित नहीं हो सकी। नतीजतन, राशन आपूर्ति की समस्या लगातार बनी रही है और हितग्राहियों को बार-बार परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
अब बड़ा सवाल यह है कि जब पूरा जिला राशन का इंतजार कर रहा था, तब नान के जिम्मेदार अधिकारी क्या कर रहे थे? क्या यह महज लापरवाही है या फिर व्यवस्था में कोई बड़ा खेल चल रहा है? महासमुंद में “मुफ्त राशन योजना” अब सिर्फ कागजों और भाषणों तक सीमित रह गई है, जबकि हकीकत में गरीबों की थाली खाली है।
इस मामले में जब खाद्य नागरिक आपूर्ति निगम (नान) के प्रबंधक विनोद बुद्धिचा से उनका पक्ष जानने के लिए फोन पर संपर्क करने की कोशिश की गई, तो उन्होंने कॉल रिसीव नहीं किया। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस गंभीर मामले में क्या कार्रवाई करता है, या फिर यह मुद्दा भी हर बार की तरह फाइलों में दबकर रह जाएगा।


