Saturday, 7 Mar 2026

झूठे प्रकरण में जेल भेजने पर न्यायालय का सख्त फैसला प्रतिवादियों को 2 लाख रुपये क्षतिपूर्ति देने के आदेश

महासमुंद। झूठे मामले में फंसाकर जेल भेजे जाने तथा विद्वेषपूर्ण कार्रवाई के एक गंभीर प्रकरण में न्यायालय ने अहम फैसला सुनाते हुए पीड़ित को 2 लाख रुपये क्षतिपूर्ति प्रदान करने का आदेश दिया है। यह आदेश दिनांक 15 जनवरी 2026 को पारित किया गया।

प्राप्त जानकारी के अनुसार पूर्व पार्षद, आरटीआई एवं सामाजिक कार्यकर्ता पंकज साहू ने नगर पालिका परिषद महासमुंद में वर्ष 2010 से 2015 के दौरान हुए कथित भ्रष्टाचार के विरुद्ध आवाज उठाई थी। इसके बाद वर्ष 2012 में कचहरी चौक स्थित उनके होटल में अवैध तोड़फोड़ की घटना हुई, जिसमें वे घायल भी हुए। संबंधितों के विरुद्ध रिपोर्ट दर्ज कराने के बाद, प्रतिशोधवश उनके एवं परिजनों के खिलाफ झूठी रिपोर्ट दर्ज कराकर उन्हें जेल भेज दिया गया था, जहां वे लगभग 6 दिनों तक निरुद्ध रहे।

बाद में न्यायालय द्वारा वर्ष 2019 में पंकज साहू सहित सभी आरोपियों को दोषमुक्त किया गया। इसके पश्चात उन्होंने झूठी रिपोर्ट दर्ज करने और विद्वेषपूर्ण अभियोजन के विरुद्ध विभागीय व न्यायिक स्तर पर कार्रवाई की। जांच में संबंधित थाना प्रभारी को दोषी पाया गया और विभागीय दंड भी दिया गया।

वर्ष 2022 में पंकज साहू द्वारा महासमुंद न्यायालय में क्षतिपूर्ति का वाद दायर किया गया, जिसमें माननीय न्यायालय ने प्रतिवादी  चमेली देशलहरा एवं  प्रमीला मंडावी को संयुक्त रूप से 2 लाख रुपये क्षतिपूर्ति राशि अदा करने के आदेश दिए हैं। वाद में जमा न्याय शुल्क 23,800 रुपये वापस करने के भी निर्देश दिए गए हैं। इस निर्णय पर प्रतिक्रिया देते हुए पंकज साहू ने कहा कि “सत्य परेशान हो सकता है, पर पराजित नहीं।” उन्होंने आम नागरिकों से अपील की कि पुलिसिया दुरुपयोग और झूठे आरोपों से डरने के बजाय संविधान प्रदत्त अधिकारों के तहत संघर्ष करें, न्याय अवश्य मिलेगा।

 

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