Saturday, 7 Mar 2026

मतदाता सूची SIR में खेल? हजारों आपत्तियां, फर्जीवाड़े के आरोप

बागबाहरा।खल्लारी विधानसभा क्षेत्र में चल रहे एसआईआर (Special Intensive Revision) अभियान के दौरान मतदाता सूची से नाम कटवाने के लिए बड़े पैमाने पर आपत्तियां दायर किए जाने का मामला अब गंभीर विवाद का रूप लेता जा रहा है। आरोप है कि एसआईआर प्रक्रिया का सहारा लेकर कुछ व्यक्तियों द्वारा जाति और समुदाय विशेष के मतदाताओं को निशाना बनाते हुए एक ही दिन में असामान्य संख्या में आपत्तियां दर्ज कराई गईं। इससे पूरी पुनरीक्षण प्रक्रिया की निष्पक्षता और पारदर्शिता पर सवाल उठने लगे हैं।

जानकारी के अनुसार 22 जनवरी को कुछ व्यक्तियों ने अलग-अलग मतदान केंद्रों के मतदाताओं के खिलाफ बड़ी संख्या में आपत्तियां लगाईं, जबकि उनका संबंधित बूथों से प्रत्यक्ष संबंध भी स्पष्ट नहीं बताया जा रहा। उपलब्ध विवरण के अनुसार रमन दास वैष्णव  30 आपत्ति, यादराम रावत  18 आपत्ति, अजय कुमार धुव  16 आपत्ति, हरिचंदन दीवान 10 आपत्ति, देवानंद शर्मा 10 आपत्ति, होमलाल साहू  9 आपत्ति, राकेश साहू  6 आपत्तियां की है।

गौरतलब है कि इन सात लोगों द्वारा मिलकर 100 से अधिक नामों पर आपत्ति दर्ज किए जाने की बात सामने आई है। आरोप है कि इनमें बड़ी संख्या मुस्लिम और अनुसूचित जाति समुदाय के मतदाताओं की है। स्थानीय स्तर पर की गई पड़ताल में कई नाम संबंधित क्षेत्र के स्थायी और पात्र मतदाता पाए जाने का दावा किया गया है। आपत्तियों के साथ दिए गए घोषणा पत्र में यह स्पष्ट उल्लेख रहता है कि गलत जानकारी देने पर लोकप्रतिनिधित्व अधिनियम 1950 की धारा 31 के तहत दंड का प्रावधान है। इसके बावजूद इतनी बड़ी संख्या में आपत्तियां दर्ज होना प्रशासनिक जांच का विषय बन गया है।

मामले को और गंभीर बनाते हुए यह भी बताया जा रहा है कि एसआईआर से जुड़े 4 हजार से अधिक आपत्ति प्रकरण अब तक लंबित हैं और उन पर कोई ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई है। लंबित मामलों का यह आंकड़ा पुनरीक्षण प्रक्रिया की गति और सत्यापन तंत्र पर भी सवाल खड़े कर रहा है।

खल्लारी क्षेत्र के कांग्रेस से जुड़े पूर्व ब्लॉक अध्यक्ष अंकित बागबाहरा ने पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच, आपत्तियों की बूथ-स्तरीय सत्यापन और फर्जी आवेदन करने वालों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि एसआईआर जैसी संवेदनशील प्रक्रिया का दुरुपयोग लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए खतरे का संकेत है। अब निगाहें निर्वाचन पंजीयन अधिकारी और जिला प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हैं कि एसआईआर के दौरान दर्ज आपत्तियों की गहन जांच कब तक पूरी होती है और यदि गड़बड़ी पाई जाती है तो जिम्मेदार लोगों पर क्या कार्रवाई की जाती है।

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