महासमुंद। जिले में इन दिनों ऐसा माहौल बनता जा रहा है मानो कुछ लोगों और प्रशासनिक अधिकारियों ने यह ठान लिया हो कि न्यायालय चाहे जितने आदेश जारी करे, पालन करना या न करना उनकी अपनी इच्छा पर निर्भर है। शहर के अलग-अलग क्षेत्रों में देर रात तक तेज ध्वनि विस्तारक यंत्रों और डीजे का शोर लगातार सुनाई दे रहा है।
स्थिति यह है कि रात 11 बजे से लेकर 12 बजे और कई स्थानों पर उससे भी अधिक समय तक लाउड म्यूजिक बजाया जा रहा है, लेकिन इसे रोकने के लिए न तो जिला प्रशासन सक्रिय दिखाई दे रहा है और न ही पुलिस प्रशासन की कोई प्रभावी कार्रवाई नजर आ रही है।
परीक्षा काल में बढ़ी परेशानी गौरतलब है कि 20 फरवरी से केंद्रीय बोर्ड एवं छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल की परीक्षाएं शुरू हो चुकी हैं। हजारों विद्यार्थी पूरे वर्ष की मेहनत के बाद परीक्षा दे रहे हैं। ऐसे संवेदनशील समय में रातभर बजते तेज संगीत और डीजे की आवाज़ विद्यार्थियों की पढ़ाई और नींद दोनों को प्रभावित कर रही है। अभिभावकों का कहना है कि प्रशासनिक लापरवाही का सीधा नुकसान पढ़ने वाले बच्चों को उठाना पड़ रहा है। परीक्षा की तैयारी कर रहे छात्रों को शोरगुल के बीच पढ़ाई करना मजबूरी बन गया है।
न्यायालय के आदेशों पर सवाल ध्वनि प्रदूषण को लेकर न्यायालय द्वारा निर्धारित समय सीमा स्पष्ट होने के बावजूद शहर में खुलेआम नियमों की अनदेखी हो रही है। सवाल उठ रहा है कि जब नियम मौजूद हैं तो उनका पालन सुनिश्चित कराने की जिम्मेदारी कौन निभाएगा?
कार्रवाई की मंशा पर उठे सवाल स्थानीय लोगों का आरोप है कि शिकायत के बावजूद कई स्थानों पर देर रात तक कार्यक्रम चलते रहते हैं। इससे यह धारणा मजबूत हो रही है कि या तो प्रशासन के पास समय नहीं है या फिर कार्रवाई की इच्छाशक्ति का अभाव है।
विद्यार्थियों का भविष्य बनाम लापरवाही विशेषज्ञों का मानना है कि परीक्षा के दौरान शांत वातावरण विद्यार्थियों के मानसिक संतुलन और प्रदर्शन के लिए बेहद जरूरी होता है। ऐसे में ध्वनि प्रदूषण केवल नियम उल्लंघन ही नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के भविष्य के साथ समझौता भी माना जा रहा है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन परीक्षा अवधि की गंभीरता को समझते हुए सख्त कदम उठाता है या फिर शहर में शोर के बीच छात्रों की मेहनत यूं ही प्रभावित होती रहेगी।


