Saturday, 7 Mar 2026

आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने भरी हुंकार, सरकार के खिलाफ जमकर निकली भड़ास 

महासमुंद। जिले के पांचों विकासखंड महासमुंद, बागबाहरा, बसना, सरायपाली और पिथौरा की हजारों आंगनबाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिकाएं गुरुवार को शहर के लोहिया चौक में दो दिवसीय कामबंद हड़ताल के तहत धरना-प्रदर्शन पर बैठीं। संयुक्त मंच के बैनर तले आयोजित इस आंदोलन के कारण जिले के लगभग 1800 आंगनबाड़ी केंद्रों में सेवाएं पूरी तरह प्रभावित रहीं। धरना स्थल पर कार्यकर्ताओं ने सरकार के खिलाफ जोरदार नारेबाजी करते हुए शासकीय कर्मचारी का दर्जा, मानदेय वृद्धि और सामाजिक सुरक्षा की मांग को लेकर आक्रोश जताया। प्रदर्शन में जिलेभर से करीब 3600 कार्यकर्ता एवं सहायिकाएं शामिल हुईं।

गौरतलब है कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ता सहायिकाओ के आंदोलन को समर्थन देने के लिए पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष राशि त्रिभुवन महिलांग, जिला कांग्रेस के पूर्व जिला अध्यक्ष रश्मि चंद्राकर, पूर्व शहर अध्यक्ष खिलावन बघेल, कांग्रेस शहर अध्यक्ष गुरमीत चावला, पूर्व पार्षद संजय शर्मा सहित अन्य कांग्रेस नेता धरने को समर्थन देने पहुंचे थे।

धरना प्रदर्शन का नेतृत्व छत्तीसगढ़ सक्षम आंगनबाड़ी कार्यकर्ता सहायिका कल्याण संघ की प्रदेश अध्यक्ष सुधा रात्रे, जिला अध्यक्ष सुलेखा शर्मा, छत्तीसगढ़ कार्यकर्ता सहायिका संघ की जिला अध्यक्ष द्रोपति साहू ने किया। उन्होंने कहा कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ता सरकार की योजनाओं की रीढ़ हैं, लेकिन वर्षों से उन्हें न्यूनतम सुविधाओं से भी वंचित रखा गया है।

उन्होंने कहा कि कार्यकर्ता घर-घर जाकर पोषण आहार वितरण, टीकाकरण जागरूकता, गर्भवती महिलाओं की देखभाल और महिला-बाल विकास योजनाओं को लागू करती हैं, बावजूद इसके उन्हें कर्मचारी का दर्जा नहीं दिया जा रहा। लगातार बढ़ते कार्यभार के बावजूद मानदेय में उचित वृद्धि नहीं होना गंभीर अन्याय है। प्रदेश स्तर पर 26 एवं 27 फरवरी को डेढ़ लाख से अधिक आंगनबाड़ी केंद्र बंद रखने का आह्वान किया गया है। महासमुंद जिले में हड़ताल के चलते बच्चों का पोषण आहार वितरण, टीकाकरण कार्यक्रम और महिला-बाल विकास विभाग की कई सेवाएं प्रभावित रहीं। धरना सभा के बाद प्रदर्शनकारियों ने रैली निकालकर कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर प्रधानमंत्री एवं मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपने की घोषणा की।

तीन सूत्रीय प्रमुख मांगें आंगनबाड़ी कार्यकर्ता-सहायिकाओं को शासकीय कर्मचारी का दर्जा दिया जाए। मानदेय में वृद्धि कर पेंशन, ग्रेच्युटी, बीमा सहित सामाजिक सुरक्षा लागू की जाए। अवकाश लेने पर मानदेय कटौती की व्यवस्था तत्काल समाप्त की जाए। कार्यकर्ताओं ने स्पष्ट किया कि यदि मांगों पर शीघ्र निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को उग्र किया जाएगा। दूसरे चरण में 9 मार्च को रायपुर में प्रांतीय धरना एवं विधानसभा घेराव प्रस्तावित है।

धरना में प्रमुख रूप से शामिल होने वाले लोगों में सुधा रात्रे, द्रोपति साहू, सुलेखा शर्मा, हज़रानीशा खान, सुशीला ठाकुर, अन्नपूर्णा वैष्णव, भारती ठाकुर, विभा साव, रामेश्वरी धृतलहरे, अशोक गिरी गोस्वामी सहित बड़ी संख्या में कार्यकर्ता एवं सहायिकाएं उपस्थित रहीं। महिलाओं और बच्चों के पोषण एवं देखभाल की जिम्मेदारी निभाने वाली आंगनबाड़ी कार्यकर्ताएं क्या स्वयं ही सरकारी उपेक्षा का सामना कर रही हैं? जिले में जारी यह आंदोलन अब नीति-निर्माताओं के सामने गंभीर चुनौती बनता नजर आ रहा है।

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