Saturday, 7 Mar 2026

महासमुंद पुलिस को बड़ी सफलता, 15 माओवादियों ने थमे हथियार, मुख्यधारा में लौटे  

बरगढ़-बलांगीर-महासमुंद डिवीजन पूरी तरह समाप्त, क्षेत्र नक्सल मुक्त  

महासमुंद। माओवादियों के खिलाफ छत्तीसगढ़ पुलिस और शासन की नीतियों को बड़ी कामयाबी मिली है। महासमुंद जिले में आज 15 माओवादियों ने हथियारों के साथ आत्मसमर्पण किया। इनमें 9 महिलाएं और 6 पुरुष शामिल हैं। यह घटना “पूना मारगेम – पुनर्वास से पुनर्जीवन” कार्यक्रम के तहत हुई, जिसमें माओवादियों ने हिंसा का रास्ता छोड़कर संविधान और तिरंगे को अपनाया। आत्मसमर्पण बलौदा थाने (ओडिशा सीमा के निकट) में देर रात हुआ। सभी को महासमुंद के रक्षित केंद्र परिसदा में तिरंगा, संविधान की प्रति और लाल गुलाब देकर सम्मानित किया गया।

आत्मसमर्पित माओवादियों में सबसे प्रमुख नाम विकास उर्फ सुदर्शन उर्फ जंगू उर्फ बाबन्ना उर्फ राजन्ना (57 वर्ष, मूल निवासी वारंगल, तेलंगाना) का है। वे ओडिशा राज्य कमेटी के स्टेट कमेटी मेंबर (SCM) और बीबीएम डिवीजन के प्रभारी थे। उनके सिर पर 25 लाख रुपये का इनाम था। वे 1985 से संगठन में सक्रिय थे और ओडिशा स्टेट कमेटी के निर्माण में शामिल रहे।  अन्य प्रमुख आत्मसमर्पित माओवादियों में मंगेश उर्फ रमेश पद्दा, (35 वर्ष, कांकेर) – डिविजनल कमेटी मेंबर (DCM), 8 लाख इनामी, AK-47 के साथ। बाबू उर्फ सैतु उर्फ बबलू (35 वर्ष, नारायणपुर) – DCM, 8 लाख इनामी, SLR के साथ। कुल इनामी राशि: 73 लाख रुपये (1 SCM – 25 लाख, 2 DCM – 8-8 लाख, 5 ACM – 5-5 लाख, 7 PM – 1-1 लाख)।  समर्पित हथियारों में AK-47 राइफल 3, SLR राइफल 2, INSAS राइफल 2, 303 राइफल 4 ,12 बोर: 3, 14 अत्याधुनिक और ऑटोमेटिक हथियार।  इस आत्मसमर्पण के बाद ओडिशा राज्य कमेटी का पश्चिमी सब जोन (बरगढ़-बलांगीर-महासमुंद डिवीजन) पूरी तरह समाप्त हो गया। छत्तीसगढ़ के रायपुर पुलिस रेंज और ओडिशा के संबलपुर रेंज अब नक्सल मुक्त हो गए हैं। शासन के दावा के अनुसार, मार्च 2026 तक नक्सलवाद के समूल उन्मूलन का लक्ष्य पूरा होने की ओर मजबूत कदम बढ़ा है। पुलिस ने आकाशवाणी, पोस्टर, पैंफलेट और अन्य माध्यमों से लगातार अपील की थी। माओवादी विचारधारा की थकान, जंगलों की कठिनाइयां, परिवार से दूरी और पहले सरेंडर करने वालों की खुशहाली देखकर उन्होंने मुख्यधारा चुन ली।

महासमुंद पुलिस ने बस्तर के बचे नक्सलियों और ओडिशा के पूर्वी सब जोन के कैडर से अपील की है कि वे हथियार त्याग दें, संविधान थामें और विकास का रास्ता अपनाएं। राज्य की शांति, संवाद और विकास नीति से लगातार सफलता मिल रही है।

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