अफीम खोजो, 51 हजार पाओ” राजनीति में नया ऑफर या मुद्दों की खेती?
महासमुंद। प्रदेश की राजनीति में इन दिनों बयानबाजी की फसल कुछ ज्यादा ही लहलहा रही है। ताजा मामला कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अंकित बागबाहरा के उस ऐलान का है, जिसमें उन्होंने अफीम की खेती का “भंडाफोड़” करने वालों को 51 हजार रुपये इनाम देने की घोषणा कर दी है।
विधानसभा घेराव से लौटे नेता जी ने कहा कि देश और प्रदेश में “सूखे नशे” के जरिए युवाओं का भविष्य खराब किया जा रहा है और इसके पीछे भाजपा का कुचक्र है। उन्होंने समोदा और बलरामपुर का उदाहरण देते हुए दावा किया कि भाजपाइयों के संरक्षण में अफीम की खेती तक हो रही है। अब सवाल यह उठता है कि क्या अवैध अफीम की खेती का पता लगाना अब प्रशासन का काम कम और “इनामी योजना” ज्यादा हो गया है?
घोषणा के अनुसार, जो भी व्यक्ति अफीम की खेती की पुख्ता जानकारी देगा, उसका नाम गुप्त रखा जाएगा और उसे 51 हजार रुपये का इनाम मिलेगा। इसके लिए बाकायदा मोबाइल नंबर भी जारी किया गया है, यानि सूचना तंत्र अब आधिकारिक से ज्यादा “पर्सनल नेटवर्क” पर निर्भर होता नजर आ रहा है।
जहां एक ओर सरकारें नशे के खिलाफ बड़े-बड़े अभियान चलाने का दावा करती हैं, वहीं दूसरी ओर राजनीतिक दलों के नेता अब खुद ही “इनाम योजना” लेकर मैदान में उतर रहे हैं। इससे यह बहस तेज हो गई है कि क्या कानून व्यवस्था पर भरोसा कम हो रहा है या फिर यह महज राजनीतिक तीर है, जो विरोधियों पर निशाना साधने के लिए छोड़ा गया है?
राजनीति में पहले घोषणाएं विकास की होती थीं, अब “सूचना दो-इनाम लो” स्कीम भी जुड़ गई है। फर्क बस इतना है कि यहां लॉटरी नहीं, अफीम की खेती खोजनी है!
अफीम की खेती जैसे गंभीर मुद्दे पर सख्त कार्रवाई की जरूरत से कोई इनकार नहीं कर सकता, लेकिन सवाल यही है, क्या इनाम की घोषणा से जमीनी स्तर पर बदलाव आएगा, या यह भी राजनीतिक बयानबाजी की फसल बनकर रह जाएगा?


