Wednesday, 10 Jun 2026

छत्तीसगढ़ सरकार का बड़ा फैसला, तीन वरिष्ठ IPS अधिकारियों की पदावनति निरस्त, बहाल हुई स्थिति

रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार की मंत्रिपरिषद ने वर्ष 1988 बैच के तीन वरिष्ठ भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) अधिकारियों संजय पिल्ले, आर.के. विज और मुकेश गुप्ता से जुड़े बहुचर्चित पदावनति प्रकरण में बड़ा फैसला लेते हुए वर्ष 2019 में जारी आदेशों को निरस्त कर दिया है। मंगलवार 28 अप्रैल 2026 को हुई मंत्रिपरिषद की बैठक में इस संबंध में निर्णय लिया गया।

मंत्रिपरिषद ने 26 सितंबर 2019 को जारी उस आदेश का पुनर्विलोकन किया, जिसके तहत तीनों अधिकारियों की पदावनति की गई थी। समग्र प्रशासनिक तथ्यों और परिस्थितियों की समीक्षा के बाद उक्त आदेश को निरस्त करने की मंजूरी दी गई। इसके साथ ही, 24 सितंबर 2019 को लिए गए उस मूल प्रशासनिक निर्णय को भी अपास्त कर दिया गया, जिसके आधार पर बाद में पदावनति आदेश जारी हुए थे।

सरकार के निर्णय के अनुसार, 24 सितंबर 2019 के बाद इन अधिकारियों की सेवा स्थिति से संबंधित जो भी आदेश जारी किए गए थे, वे अब प्रभावहीन माने जाएंगे। शासन ने स्पष्ट किया है कि तीनों अधिकारियों की सेवा स्थिति को उस समय से पूर्व की स्थिति में पुनर्जीवित माना जाएगा। इससे उनके पद, वरिष्ठता और सेवा अभिलेखों पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ सकता है।

उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने मंत्रिपरिषद के फैसलों की जानकारी मीडिया को देते हुए कहा कि सरकार ने सभी तथ्यों का परीक्षण करने के बाद यह निर्णय लिया है। उन्होंने कहा कि प्रशासनिक न्याय और प्रक्रिया की शुचिता को ध्यान में रखते हुए यह फैसला लिया गया है।

उल्लेखनीय है कि वर्ष 2019 में तत्कालीन सरकार ने इन अधिकारियों को डीजीपी रैंक से पुनः एडीजी स्तर पर लाने का निर्णय लिया था, जिसके बाद यह मामला प्रशासनिक और कानूनी हलकों में चर्चा का विषय बन गया था। उस समय पदोन्नति प्रक्रिया, स्वीकृत पदसंख्या और प्रशासनिक प्रक्रियाओं को लेकर सवाल उठे थे।

माना जा रहा है कि वर्तमान निर्णय से वर्षों पुराने विवाद का पटाक्षेप होगा। साथ ही राज्य प्रशासनिक ढांचे में यह संदेश भी गया है कि पूर्व के विवादित निर्णयों की समीक्षा कर सुधारात्मक कदम उठाए जा सकते हैं। आने वाले दिनों में गृह विभाग और सामान्य प्रशासन विभाग इस संबंध में विस्तृत आदेश जारी कर सकते हैं।

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