महासमुंद। जिले के पिथौरा थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम ठाकुरदिया खुर्द में प्रधानमंत्री आवास योजना की राशि से कथित अवैध वसूली का मामला सामने आया है। गांव निवासी एवं दिव्यांग हितग्राही चेतराम साहू ने जिला पुलिस अधीक्षक को लिखित आवेदन सौंपकर ग्राम सरपंच मनोज कुमार सिन्हा पर योजना की दूसरी किस्त से 20 हजार रुपये जबरन लेने, जातिसूचक गाली देने, मारपीट करने तथा लगातार धमकाने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। मामले ने ग्रामीण क्षेत्र में हलचल मचा दी है।
पीड़ित चेतराम साहू ने आवेदन में बताया है कि वह एक पैर से दिव्यांग है तथा प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत उसका मकान स्वीकृत हुआ है। योजना की पहली किस्त के रूप में 40 हजार रुपये तथा दूसरी किस्त के रूप में 55 हजार रुपये उसके बैंक खाते में जमा हुए थे। आरोप है कि दूसरी किस्त आने के बाद ग्राम सरपंच ने उससे कहा कि 20 हजार रुपये देना पड़ेगा, अन्यथा आगे की किस्त नहीं मिलेगी।
आवेदन के अनुसार, जब चेतराम साहू बैंक से राशि निकालकर बाहर निकला, तभी उससे 20 हजार रुपये ले लिए गए। पीड़ित का कहना है कि उसने मजबूरी में मकान निर्माण और कर्ज चुकाने के लिए शेष राशि खर्च कर दी। इसके बावजूद सरपंच द्वारा दोबारा 5 हजार रुपये की मांग की गई। रकम देने में असमर्थता जताने पर उसके साथ अभद्र व्यवहार, जातिसूचक अपमान और मारपीट किए जाने का आरोप लगाया गया है।
पीड़ित ने आवेदन में यह भी उल्लेख किया है कि आरोपी स्वयं को प्रभावशाली व्यक्ति बताते हुए राजनीतिक पहुंच का डर दिखाता है और शिकायत करने पर झूठे प्रकरण में फंसाने की धमकी देता है। चेतराम साहू का कहना है कि भय के कारण वह अब तक शिकायत नहीं कर पा रहा था, लेकिन लगातार प्रताड़ना और पैसों की मांग से परेशान होकर उसने पुलिस अधीक्षक से न्याय की गुहार लगाई है।
आवेदन में यह भी दावा किया गया है कि गांव के अन्य लोगों से भी विभिन्न योजनाओं के नाम पर रकम मांगने की शिकायतें हैं। पीड़ित ने मामले से संबंधित ऑडियो-वीडियो साक्ष्य होने तथा कुछ ग्रामीणों के घटना के प्रत्यक्षदर्शी होने की बात कही है। पीड़ित ने जिला पुलिस अधीक्षक से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर तत्काल प्राथमिकी दर्ज करने, आरोपी के विरुद्ध सख्त कानूनी कार्रवाई करने तथा उसे सुरक्षा प्रदान करने की मांग की है।
इधर, मामले की शिकायत सामने आने के बाद प्रशासनिक अमले की भूमिका पर भी सवाल उठने लगे हैं। यदि आरोप सत्य पाए जाते हैं तो यह गरीब हितग्राहियों के लिए चलाई जा रही सरकारी योजनाओं में भ्रष्टाचार का गंभीर उदाहरण माना जाएगा। फिलहाल पुलिस द्वारा आवेदन प्राप्त कर जांच की प्रक्रिया शुरू किए जाने की जानकारी मिली है।


