गरियाबंद। छत्तीसगढ़ का सुदूरवर्ती आदिवासी जिला गरियाबंद आज सामाजिक चेतना और संगठन का केंद्र बनता जा रहा है। लगभग चार वर्ष पूर्व यहां के जागरूक युवाओं और वरिष्ठजनों ने मिलकर पूरे जिले के रविदासी समाज को संगठित करने की पहल की थी। इस संगठित प्रयास का परिणाम आज साफ दिखाई दे रहा है — जिले में धर्मान्तरण पर रोकथाम, शराबबंदी को बढ़ावा और विशेषकर महिलाओं की शिक्षा पर गहन फोकस किया जा रहा है।
हर सामाजिक बैठक में अब महिलाओं की भागीदारी बढ़ती जा रही है, जिससे समाज में नई सोच और समानता का वातावरण बन रहा है। रविदासी समाज ने बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर की उस प्रेरणादायी बात को अपनी दिशा बना लिया है —
“मैं किसी समाज की सामाजिक उपलब्धि इस बात से मापता हूँ कि उस समाज में महिलाओं की स्थिति कैसी है।”
इसी कड़ी में कल गरियाबंद जिले में एक महत्वपूर्ण सामाजिक बैठक का आयोजन किया गया। इस बैठक में समाज के सैकड़ों लोगों ने हिस्सा लिया और मिलकर यह संकल्प लिया कि गुरु रविदास जी के विचारों और गुरु-वाणी को हर घर तक पहुंचाया जाएगा। साथ ही, शिक्षा को आंदोलन के रूप में आगे बढ़ाते हुए यह सुनिश्चित किया जाएगा कि हर बच्चा और विशेषकर हर बेटी पढ़े-लिखे और आत्मनिर्भर बने।
कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि यदि समाज को आगे बढ़ाना है तो नशा और अशिक्षा को जड़ से खत्म करना होगा। इसी सोच के साथ समाज ने “हर घर शिक्षा – हर घर गुरु वाणी” का नारा दिया और इसे जन-आंदोलन बनाने का संकल्प लिया।
इस अवसर पर उपस्थित महिलाओं ने भी समाज सुधार की दिशा में अपनी सक्रिय भूमिका निभाने का भरोसा दिलाया और शिक्षा के साथ-साथ सामाजिक कुरीतियों को दूर करने का संकल्प लिया।


