Friday, 4 Sep 2026

रायगढ़ के वन तस्करी के अंतर्राज्यीय सिंडिकेट मामले में मनीष अग्रवाल की अहम भूमिका?

बसना में पुलिस पहुंची थी तब परिजनों ने किया था हंगामा।

रायगढ़ के वन तस्करी के अंतर्राज्यीय सिंडिकेट का खुलासा, तीन आरोपी गिरफ्तार; फर्जी टीपी की आड़ में खैर-तेंदू की तस्करी का आरोप

महासमुंद/रायगढ़। रायगढ़ पुलिस और वन विभाग ने खैर एवं तेंदू जैसी बेशकीमती लकड़ियों की अवैध कटाई और अंतर्राज्यीय तस्करी से जुड़े बड़े सिंडिकेट का पर्दाफाश करने का दावा किया है। पुलिस ने मामले में तीन मुख्य आरोपियों रोहित मित्तल, मनीष अग्रवाल और सलाउद्दीन खान को गिरफ्तार किया है, जबकि एक अन्य आरोपी भरत कुमार मेश्राम फरार बताया जा रहा है। इस कार्रवाई में महासमुंद जिले के मनीष अग्रवाल की गिरफ्तारी सबसे अहम कड़ी के रूप में सामने आई है। पुलिस के अनुसार मनीष अग्रवाल कथित रूप से इस पूरे नेटवर्क में रोहित मित्तल का सहयोगी और बिजनेस पार्टनर था। दोनों पर अवैध रूप से कटवाई गई लकड़ियों के भंडारण, उनकी छिलाई एवं अन्य प्रक्रिया कराने और फिर दूसरे राज्यों में भेजने में भूमिका होने का आरोप है।

गिरफ्तारी से दो दिन पहले बसना पहुंची थी रायगढ़ पुलिस

मनीष अग्रवाल की गिरफ्तारी से पहले रायगढ़ पुलिस की टीम जब महासमुंद जिले के बसना पहुंची थी, तब उसके परिजनों की ओर से पुलिस कार्रवाई का विरोध किए जाने और मौके पर हंगामा होने की बात सामने आई थी। पुलिस टीम के पहुंचने के बाद काफी देर तक स्थिति तनावपूर्ण रही। इसके चलते उस समय गिरफ्तारी की कार्रवाई नहीं हो सकी।

इसके ठीक दो दिन बाद पुलिस ने रणनीति बदलते हुए दोबारा कार्रवाई की और मनीष अग्रवाल को हिरासत में लिया। पूछताछ तथा विवेचना में पर्याप्त साक्ष्य मिलने का दावा करते हुए पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर भेज दिया। बसना में गिरफ्तारी के प्रयास के दौरान हुए हंगामे के बाद मनीष अग्रवाल की गिरफ्तारी ने इस पूरे मामले को महासमुंद जिले में भी चर्चा का विषय बना दिया है।

रायगढ़ से हरियाणा तक फैला नेटवर्क

पुलिस के मुताबिक यह कथित सिंडिकेट केवल रायगढ़ तक सीमित नहीं था। जांच में ओडिशा, छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश के वन क्षेत्रों से लकड़ियों की कटाई कर उन्हें रायगढ़ लाने और फिर हरियाणा, हिमाचल प्रदेश सहित अन्य राज्यों में भेजे जाने की जानकारी सामने आई है। आरोप है कि वन क्षेत्र के ग्रामीणों को पैसों का लालच देकर खैर और तेंदू के पेड़ों की कटाई कराई जाती थी। इसके बाद लकड़ियों को रायगढ़ के गढ़उमरिया स्थित गोदाम में जमा किया जाता था।

गोदाम में होता था लकड़ियों का कारोबार

पुलिस की प्रारंभिक जांच के अनुसार रोहित मित्तल ने जामटीकरा (गढ़उमरिया) में गोदाम किराये पर लिया था। इसी गोदाम में कथित तौर पर वन क्षेत्रों से लाई गई लकड़ियों को जमा किया जाता था।पुलिस का आरोप है कि रोहित मित्तल अपने सहयोगी मनीष अग्रवाल के साथ मिलकर लकड़ियों की छिलाई और अन्य प्रक्रिया कराता था। इसके बाद ट्रांसपोर्टरों के जरिए लकड़ियों को दूसरे राज्यों में भेजा जाता था।

फर्जी ट्रांसपोर्ट परमिट ने खोली पोल

इस पूरे मामले में फर्जी ट्रांसपोर्ट परमिट यानी टीपी का मामला भी सामने आया है। वन विभाग के अनुसार जब गोदाम में छापेमारी की गई थी, तब आरोपियों की ओर से लकड़ियों के परिवहन के संबंध में टीपी प्रस्तुत की गई। जांच के दौरान संबंधित टीपी पर वन परिक्षेत्र अधिकारी के हस्ताक्षर नहीं पाए गए। वन विभाग को दस्तावेज प्रथम दृष्टया फर्जी प्रतीत हुआ। इसके बाद पूरे मामले की विस्तृत जांच शुरू की गई और पुलिस को शिकायत देकर अपराध दर्ज कराया गया।

मई 2025 में वन विभाग ने मारा था छापा

मामले की शुरुआत 5 मई 2025 को हुई कार्रवाई से जुड़ी है। वन विभाग की टीम ने जामटीकरा (गढ़उमरिया) स्थित गोदाम में छापेमारी कर बड़ी मात्रा में तेंदू और खैर प्रजाति की लकड़ियां बरामद की थीं। कार्रवाई के दौरान ट्रक क्रमांक CG 15 DV-7577 में लदे 42 नग तेंदू प्रजाति के लट्ठे बरामद किए गए थे। इसके अलावा गोदाम से 146 नग तेंदू एवं खैर प्रजाति के लट्ठे, जलाऊ लकड़ी, वजन मशीन, कुल्हाड़ी, हथौड़ा और कटर मशीन सहित अन्य सामग्री जब्त किए जाने की जानकारी वन विभाग ने दी है। छापेमारी के दौरान रोहित मित्तल और उसके साथी मौके से फरार हो गए थे।

दोबारा जांच के बाद दर्ज हुआ अपराध

वन विभाग की जांच में मामला बड़ा और संगठित अपराध प्रतीत होने के बाद डीएफओ रायगढ़ की ओर से 2 सितंबर 2026 को जूटमिल थाने में विस्तृत जांच के लिए आवेदन दिया गया। इसके बाद थाना जूटमिल में अपराध क्रमांक 490/2026 दर्ज किया गया। मामले में भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के साथ भारतीय वन अधिनियम के तहत कार्रवाई की गई है।

एसएसपी ने गठित की विशेष टीम

मामले की गंभीरता को देखते हुए रायगढ़ एसएसपी शशि मोहन सिंह ने नगर पुलिस अधीक्षक मयंक मिश्रा के नेतृत्व में विशेष टीम गठित की। टीम ने आरोपियों की भूमिका की जांच की और कथित सिंडिकेट में उनकी भागीदारी से जुड़े साक्ष्य जुटाए। पुलिस के मुताबिक जांच में रोहित मित्तल, मनीष अग्रवाल और सलाउद्दीन खान की भूमिका सामने आने के बाद तीनों को हिरासत में लिया गया। पर्याप्त साक्ष्य पाए जाने पर उन्हें गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर भेजा गया है।

मनीष अग्रवाल पर पुलिस की जांच का फोकस

महासमुंद जिले के मनीष अग्रवाल को पुलिस ने इस मामले में महत्वपूर्ण आरोपी बताया है। पुलिस के अनुसार वह रोहित मित्तल का बिजनेस पार्टनर था और लकड़ियों के कथित अवैध कारोबार में गोदाम से लेकर दूसरे राज्यों तक माल भेजने की प्रक्रिया में उसकी भूमिका की जांच की गई। अब पुलिस यह भी जांच कर रही है कि इस कथित नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल थे तथा किन-किन राज्यों में लकड़ियों की सप्लाई की गई।

एक आरोपी अब भी फरार

मामले में रोहित मित्तल, मनीष अग्रवाल और सलाउद्दीन खान की गिरफ्तारी हो चुकी है, जबकि भरत कुमार मेश्राम फरार बताया जा रहा है। पुलिस उसकी तलाश कर रही है। रायगढ़ पुलिस और वन विभाग की इस कार्रवाई से वन संपदा की अवैध कटाई, भंडारण और अंतर्राज्यीय तस्करी से जुड़े नेटवर्क का खुलासा होने का दावा किया गया है। मामले की विवेचना अभी जारी है और जांच आगे बढ़ने के साथ इस नेटवर्क से जुड़े अन्य नाम भी सामने आने की संभावना है।

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