Wednesday, 30 Sep 2026

मानव तस्करी की आड़ में चल रहा था दैहिक शोषण, हॉस्पिटल के मेमो से मामला आया सामने, 5 गिरफ्तार

10 ठिकानों पर दबिश, 1.48 करोड़ रुपये नकद जब्त, पांच आरोपी गिरफ्तार

महासमुंद। मानव तस्करी, बंधुआ मजदूरी और बाल मजदूरी के एक कथित संगठित नेटवर्क का महासमुंद पुलिस ने खुलासा किया है। पुलिस के अनुसार नाबालिग बालिका के शारीरिक शोषण और गर्भवती होने की जानकारी अस्पताल से मिलने के बाद शुरू हुई जांच में मानव तस्करी से जुड़े नेटवर्क का पता चला। कार्रवाई के दौरान महासमुंद और ओडिशा में आरोपियों के 10 ठिकानों पर दबिश दी गई। पुलिस ने करीब 1 करोड़ 48 लाख 54 हजार 750 रुपये नकद सहित मजदूर पलायन से जुड़े रजिस्टर-डायरी, मोबाइल फोन, बैंक पासबुक, चेकबुक, एटीएम कार्ड, मॉर्टगेज स्टांप दस्तावेज और नोट गिनने की मशीन जब्त की है। पुलिस ने मामले में पांच आरोपियों मुकेश चंद्राकर, नसीम बानो उर्फ लता सबर, मनीष गुप्ता, नंदकुमार मोहंती उर्फ नंदू और पीयूष अग्रवाल को गिरफ्तार किया है।

पुलिस के अनुसार 21 सितंबर को एक अस्पताल से मिले मेमो के बाद मामले की जांच शुरू की गई। जांच के दौरान पुलिस को जानकारी मिली कि गरीब और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को एडवांस रकम देकर कथित तौर पर कर्ज के जाल में फंसाया जाता था। इसके बाद उन्हें दूसरे राज्यों में ईंट भट्ठों में काम करने के लिए भेजे जाने और दबाव बनाकर मजदूरी कराने के आरोप सामने आए।पुलिस के मुताबिक इस नेटवर्क में महिलाओं और नाबालिग बच्चों को भी दूसरे राज्यों में मजदूरी के लिए भेजे जाने के साक्ष्य मिले हैं।

मामले में 15 वर्षीय नाबालिग बालिका से जुड़े गंभीर आरोप सामने आए हैं। पुलिस के अनुसार नाबालिग को उसके परिवार के साथ उत्तर प्रदेश के एक ईंट भट्ठे पर भेजा गया था। वहां उससे कथित तौर पर मजदूरी कराई गई। इसी दौरान भट्ठे के एक जेसीबी चालक पर नाबालिग के शारीरिक शोषण का आरोप सामने आया है। पुलिस का कहना है कि इसी मामले की जांच आगे बढ़ने पर मानव तस्करी और बंधुआ मजदूरी से जुड़े अन्य तथ्यों का पता चला।

मामले की गंभीरता को देखते हुए वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशन में पुलिस की अलग-अलग टीमें गठित की गईं। इन टीमों ने महासमुंद और ओडिशा में आरोपियों के आवासीय और व्यावसायिक ठिकानों पर सर्च और रेड की कार्रवाई की। पुलिस के अनुसार तलाशी में मजदूर पलायन संबंधी रजिस्टर और डायरी, अलग-अलग मोबाइल फोन, बैंक पासबुक, चेकबुक, एटीएम कार्ड, मॉर्टगेज स्टांप दस्तावेज और नोट गिनने की मशीन बरामद हुई है।

पुलिस का दावा है कि बरामद दस्तावेजों के परीक्षण में बड़ी संख्या में मजदूरों को दूसरे राज्यों में भेजे जाने से संबंधित रिकॉर्ड मिले हैं। इन दस्तावेजों और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की जांच जारी है। पुलिस के अनुसार मानव तस्करी का यह कथित नेटवर्क छत्तीसगढ़ और ओडिशा से दूसरे राज्यों तक मजदूरों को भेजने से जुड़ा हो सकता है। उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब, जम्मू-कश्मीर, गुजरात सहित अन्य राज्यों में मजदूरों को भेजे जाने के संबंध में भी जांच की जा रही है।

पुलिस अब आरोपियों के मोबाइल फोन, सीडीआर और बैंक खातों की जांच कर रही है। जांच में यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि मजदूरों को कौन जोड़ता था, एडवांस रकम कौन देता था, उन्हें दूसरे राज्यों तक कौन पहुंचाता था और किन ईंट भट्ठों में उन्हें काम के लिए भेजा जाता था। पुलिस के अनुसार थाना खल्लारी में अपराध क्रमांक 104/2026 दर्ज किया गया है। मामले में बीएनएस की धाराओं के तहत कार्रवाई की गई है और विवेचना के दौरान बीएनएस की धारा 111 के तहत संगठित अपराध का प्रावधान भी जोड़ा गया है।

पुलिस का कहना है कि जांच में सामने आने वाले अन्य लोगों और इस नेटवर्क से जुड़े संदिग्धों की भूमिका की भी जांच की जाएगी।पुलिस अधीक्षक प्रभात कुमार ने बताया कि मामले की जांच जारी है और मोबाइल, बैंक खातों तथा बरामद दस्तावेजों की जांच के आधार पर नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों तक पहुंचने का प्रयास किया जा रहा है।

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