Tuesday, 13 Oct 2026

27 अक्टूबर को सड़कों पर उतरेंगी आंबा, कलेक्ट्रेट का हो घेराव 

महासमुंद। छत्तीसगढ़ में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं की लंबित मांगों को लेकर राज्य सरकार के खिलाफ आंदोलन की तैयारी है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता सहायिका संयुक्त मंच के बैनर तले प्रदेशभर में 27 अक्टूबर को एक दिवसीय जिला स्तरीय हड़ताल की जाएगी। इस आंदोलन में जिले के सभी आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाएं शामिल होंगी। हड़ताल के बाद जिला मुख्यालय में कलेक्ट्रेट का घेराव कर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े सहित शासन के संबंधित जिम्मेदारों के नाम ज्ञापन कलेक्टर को सौंपा जाएगा। मंच का कहना है कि वर्षों से सेवा देने के बावजूद महिला कर्मियों को नियमित कर्मचारी का दर्जा, सम्मानजनक मानदेय और जरूरी सामाजिक सुरक्षा सुविधाएं नहीं मिल पाई हैं।

 

गौरतलब है कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाएं महिला एवं बाल विकास विभाग की योजनाओं को गांव-गांव और घर-घर तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। बच्चों के पोषण, गर्भवती महिलाओं और माताओं से संबंधित सेवाओं सहित केंद्रों के नियमित संचालन की जिम्मेदारी निभाने वाली इन महिला कर्मियों का आरोप है कि काम का बोझ लगातार बढ़ रहा है, लेकिन उनकी आर्थिक और सामाजिक सुरक्षा को लेकर अपेक्षित कदम नहीं उठाए जा रहे हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब सरकार की योजनाओं को जमीन पर उतारने में इनकी अहम भूमिका है, तो इनके अधिकारों और सुविधाओं पर पर्याप्त ध्यान क्यों नहीं दिया जा रहा?

संयुक्त मंच की ओर से सुधा रात्रे सहित महिला पदाधिकारियों ने लंबित मांगों को लेकर शासन का ध्यान आकर्षित किया है। मंच की प्रमुख मांग है कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को नियमित किया जाए। नियमितीकरण होने तक कार्यकर्ताओं को 30 हजार रुपये और सहायिकाओं को 25 हजार 500 रुपये मासिक मानदेय दिया जाए। इसके अलावा कार्यकर्ताओं को सुपरवाइजर और सहायिकाओं को कार्यकर्ता के पद पर सीधे पदोन्नति देने तथा पदोन्नति में उम्र की बाध्यता समाप्त करने की मांग की गई है।

मंच ने समूह बीमा, पेंशन, ग्रेच्युटी और भविष्य निधि (पीएफ) जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराने की भी मांग रखी है। सेवा के दौरान आकस्मिक मृत्यु होने पर अनुकंपा नियुक्ति और सेवानिवृत्ति पर कार्यकर्ता को पांच लाख रुपये तथा सहायिका को तीन लाख रुपये देने की मांग भी ज्ञापन में शामिल है। इसके साथ ही मध्यप्रदेश की तर्ज पर प्रतिवर्ष मानदेय में एक हजार रुपये की वृद्धि करने की मांग की गई है।

संयुक्त मंच के बैनर तले प्रस्तावित हड़ताल और कलेक्ट्रेट घेराव के माध्यम से महिला कर्मियां अपनी मांगों को सरकार तक पहुंचाएंगी। मंच से जुड़ी रुक्मिणी सज्जन, सुधा रात्रे, कविता यादव, हेमा भारती, कल्पना चंद और अनिता नायक सुलेखा शर्मा अहिल्या मरकाम धानमती बघेल अंजू चंद्राकर रूप भारती विमला सोनी छाया हिरवानी पूर्णिमा ठाकुर पिंकी ठाकुर, पार्वती यादव, सुचित्रा मानिकपुरी तथा संतोषी वर्मा के नाम भी इस आंदोलन के संदर्भ में शामिल हैं।

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