जीने लायक वेतन व बर्खास्त पदाधिकारियों की बहाली की मांग तेज
महासमुंद। छत्तीसगढ़ में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता-सहायिका संयुक्त मंच ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। संगठन ने एलान किया है कि एक सितम्बर को प्रदेश के सभी आंगनबाड़ी केन्द्रों में तालाबंदी की जाएगी। इसके साथ ही जिला स्तर पर कार्यकर्ता-सहायिकाएं धरना, रैली और प्रदर्शन कर अपनी मांगों के समर्थन में प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौपेंगी। संगठन की प्रमुख मांग है कि कार्यकर्ता-सहायिकाओं को जीने लायक वेतन, सामाजिक सुरक्षा, पेंशन, ग्रेच्युटी, बीमा, चिकित्सा सुविधाएं और आंगनबाड़ी केन्द्रों का शासकीयकरण सुनिश्चित किया जाए।
विभाग पर दमनात्मक कार्रवाई का आरोप
संयुक्त मंच ने महिला एवं बाल विकास विभाग पर आरोप लगाया है कि समस्याओं और मांगों को उठाने वाले पदाधिकारियों को झूठे और मनगढ़ंत आरोप लगाकर सेवा से बर्खास्त किया जा रहा है।
वर्ष 2023 में रायपुर की प्रांतीय सचिव सुमन यादव को बर्खास्त किया गया, जिनका मामला अब भी कलेक्टर न्यायालय रायपुर में लंबित है।
हाल ही में पखांजूर की अध्यक्ष कल्पना चंद को सेवा से पृथक किया गया, जिनका मामला एसडीएम न्यायालय पखांजूर में लंबित है।
प्रांतीय अध्यक्ष रूक्मणी सज्जन को भी बर्खास्त किया गया था, लेकिन अपील में कलेक्टर जगदलपुर के आदेश से उन्हें सेवा में बहाल होना पड़ा। संगठन का कहना है कि विभाग जानबूझकर नोटिस पर नोटिस भेजकर पदाधिकारियों को डराने-धमकाने की रणनीति अपना रहा है।
विभागीय आदेश पर कड़ी नाराज़गी
हाल ही में संचालक, महिला एवं बाल विकास विभाग की ओर से सभी कलेक्टरों को पत्र जारी किया गया है, जिसमें कहा गया है कि बार-बार धरना/रैली करने वाले संगठनों के पदाधिकारियों को बर्खास्त किया जा सकता है। संयुक्त मंच ने इस आदेश की कड़ी निंदा करते हुए इसे निरस्त करने की मांग की है। संगठन का कहना है कि लोकतांत्रिक अधिकारों को दबाने की कोशिश की जा रही है।
तकनीकी और जमीनी समस्याओं पर नाराज़गी
कार्यकर्ता-सहायिकाओं का कहना है कि विभागीय कार्य अब मोबाइल, फेस कैप्चर, ई-केवाईसी और पोषण ट्रैकर ऐप पर आधारित हो गए हैं। लेकिन जमीनी स्तर पर 5G मोबाइल, टैबलेट और नेटवर्क की सुविधा नहीं है।
नेट न होने पर हितग्राही की एंट्री और फेस कैप्चर नहीं हो पाता, जिसके चलते मानदेय काट लिया जाता है। कई बार लाभार्थी के पास मोबाइल या ओटीपी सुविधा ही नहीं होती, जिससे उन्हें शासन की योजनाओं से वंचित होना पड़ता है।
50 वर्षों से जारी संघर्ष
संगठन ने कहा कि आईसीडीएस की स्थापना को 50 वर्ष पूरे हो गए, लेकिन आज भी आंगनबाड़ी कार्यकर्ता-सहायिकाओं को न मजदूर माना जाता है और न ही सरकारी कर्मचारी। “काम के बदले दाम” की नीति के बजाय उन्हें मानसेवी मानकर नजरअंदाज किया जा रहा है।
एक सितम्बर को बड़े आंदोलन की तैयारी
संयुक्त मंच की सदस्य और छग सक्षम आंगनबाड़ी कार्यकर्ता सहायिका संघ की प्रांत अध्यक्ष सुधा रात्रे, द्रोपति साहू, सुलेखा शर्मा ने कहा “हमने सरकार को बार-बार पत्र लिखकर और मुलाकात करके समस्याओं के समाधान की मांग की, लेकिन कोई ठोस पहल नहीं हुई। अब मजबूरन 1 सितम्बर को प्रदेश की एक लाख आंगनबाड़ी कार्यकर्ता-सहायिकाएं काम बंद कर सड़कों पर उतरेंगी और अपनी मांगों के लिए प्रदर्शन करेंगी।”


