प्रधानमंत्री आवास योजना का घर दबंगों ने पुलिस की मौजूदगी में तोड़ा, जातिसूचक गालियों से अपमानित हुई विधवा महिला, पुलिस पर सबूत छिपाने का आरोप
कबीरधाम। छत्तीसगढ़ सर्व रविदास समाज ने कवर्धा कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक से मुलाकात कर एक दलित विधवा महिला के साथ हुए अन्याय पर कड़ी नाराज़गी जताई है। समाज ने प्रशासन को स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि पीड़ित को शीघ्र न्याय नहीं मिला तो आंदोलन छेड़ा जाएगा। मामला ग्राम रक्से का है, जहां प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बन रहे अनुसूचित जाति परिवार के घर को दबंगों ने पुलिस की मौजूदगी में जमींदोज कर दिया और महिला को जातिसूचक गालियां देकर अपमानित किया। पीड़िता निर्मला खरे पिता स्व. तुलसीराम खरे, जाति मेहर (अनुसूचित जाति) ने इस संबंध में जिला प्रशासन, पुलिस विभाग, अनुसूचित जाति आयोग व मानवाधिकार आयोग तक शिकायत भेजी है।
घटना का विवरण
दिनांक 20 अगस्त 2025 को ग्राम के ही प्रभावशाली व्यक्तियों — नेतराम साहू, छन्नू साहू, पूना साहू, बलराम साहू, कमलेश साहू, लीलाराम साहू, मनोज साहू एवं रामभज साहू ने जातिसूचक टिप्पणियां करते हुए कहा — “चमार सालों को यही दबा दो” और जेसीबी से नवनिर्मित घर को जमींदोज कर दिया।
पुलिस पर पक्षपात के आरोप
पीड़ित पक्ष का आरोप है कि पुलिस दबंगों का पक्ष ले रही है। घटना का वीडियो उनके मोबाइल में मौजूद था, जिसे पुलिस ने छीनकर अपने कब्जे में ले लिया और सबूत मिटाने की कोशिश की।
लागू होने वाले अपराध व धाराएं
आईपीसी की धारा 201 (सबूत मिटाना), 409 (अपराधिक विश्वासघात), 166 (कानून का उल्लंघन), आईटी एक्ट की धारा 65/66,अनुसूचित जाति एवं जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम 1989 की धारा 3(1)(viii) व 3(v),
पीड़ित परिवार की मांगें
1. आरोपियों एवं संबंधित पुलिसकर्मियों पर SC/ST एक्ट व अन्य धाराओं के तहत FIR दर्ज कर सख्त कार्रवाई की जाए।
2. पीड़ित परिवार को मुआवजा व पुनर्वास सहायता मिले।
3. जब्त किए गए मोबाइल/वीडियो को बरामद कर न्यायालय में प्रस्तुत किया जाए।
4. पीड़ित परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।
रविदास समाज की चेतावनी
छत्तीसगढ़ सर्व रविदास समाज ने इस घटना को दलित उत्पीड़न का ज्वलंत उदाहरण बताया है। समाज के पदाधिकारियों ने कहा कि “यदि दबंगों और पुलिस की मिलीभगत से पीड़ित परिवार को न्याय से वंचित किया गया तो छत्तीसगढ़ भर में आंदोलन किया जाएगा। इस पूरे प्रकरण ने न सिर्फ प्रशासन की भूमिका पर सवाल खड़े किए हैं बल्कि यह भी साबित किया है कि योजनाओं से मिले अधिकारों को भी दबंगों की ताकत और पुलिस की लापरवाही निगल रही है।


