धान उपार्जन केन्द्र लहंगर में फर्जीवाड़ा
महासमुंद। धान उपार्जन केन्द्र लहंगर में बोनस राशि के फर्जीवाड़े का मामला अब प्रशासन की संवेदनशीलता और कार्यशैली पर बड़े सवाल खड़े कर रहा है। कलेक्टर कार्यालय (खाद्य शाखा) से 13 अगस्त 2025 को जारी आदेश में स्पष्ट रूप से कहा गया था कि आदिम जाति सेवा सहकारी समिति मर्यादित लहंगर द्वारा गंधेस्वर मंदिर ट्रस्ट और अन्य की जमीन के नाम पर कूटरचना कर बोनस राशि लाखों रुपए के हेरफेर से अध्यक्ष और उसके चितपरिचित लोगों के खातों में डाली गई है।
इस गंभीर मामले पर कलेक्टर ने 7 दिन में जांच प्रतिवेदन प्रस्तुत करने का निर्देश देते हुए पांच सदस्यीय संयुक्त जांच दल भी गठित किया था। शिकायत पत्र की प्रति तक संबंधित अधिकारियों को सौंपी गई थी।
लेकिन 33 दिन गुजर जाने के बाद भी जांच दल की ओर से अब तक कोई जांच आरंभ ही नहीं की गई। सूत्रों की मानें तो मामला रसूखदार नेताओं और मंदिर ट्रस्ट के प्रभावशाली चेहरों से जुड़ा होने के कारण पूरी कार्यवाही ठंडे बस्ते में डाल दी गई है।
प्रशासनिक लापरवाही का आलम यह है कि शिकायतकर्ताओं द्वारा बोनस घोटाले से जुड़े तमाम दस्तावेज प्रस्तुत करने के बावजूद आदेश कागज़ों से बाहर नहीं निकल पा रहे। कलेक्टर का आदेश ही हवा में उड़ गया, और जिम्मेदार अधिकारी अब तक खामोश हैं।
“महासमुंद में जंगल का राज कायम है। समर्थवान चाहे कितनी भी बेमानी कर लें, प्रशासन उनकी गर्दन दबाने की बजाय चुप्पी साध लेता है।” अब देखना होगा कि शासन इस मामले पर कब और कैसी कार्रवाई करता है। लेकिन फिलहाल तो यह स्पष्ट है कि रसूखदारों की पकड़ इतनी गहरी है कि कलेक्टर के आदेश भी बेमानी साबित हो रहे हैं।
और मामले का खुलासा होगा अगले अंक में, पढ़ते रहिए महासमुंद टाइम्स की खबर…


