बिलासपुर सराफा एसोसिएशन ने जताई चिंता, बैंक मैनेजर-अपराधियों की मिलीभगत पर उठाए सवाल
बिलासपुर, 17 अप्रैल। शहर में बढ़ती चोरी और लूट की घटनाओं के बीच चोरी के जेवरातों को बैंकों व फाइनेंस कंपनियों में गिरवी रखकर गोल्ड लोन लेने के मामलों ने सराफा कारोबारियों की चिंता बढ़ा दी है। छत्तीसगढ़ सराफा एसोसिएशन ने इस पूरे मामले में प्रशासन से सख्त नियम बनाने और गोल्ड लोन प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने की मांग की है।
हाल ही में सिविल लाइन पुलिस ने एक शातिर चोर और मणप्पुरम फाइनेंस के मैनेजर को गिरफ्तार किया था। आरोप है कि आरोपी ने चोरी के गहनों को गिरवी रखकर लोन लिया, जबकि मैनेजर ने माल चोरी का होने की जानकारी के बावजूद उसे गलाकर ठिकाने लगाने का प्रयास किया। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 40 ग्राम गला हुआ सोना बरामद किया है।
छत्तीसगढ़ सराफा एसोसिएशन के अध्यक्ष कमल सोनी ने कहा कि अपराधी अब चोरी का माल खपाने के लिए बैंकों का सहारा ले रहे हैं, क्योंकि वहां कागजी प्रक्रिया पूरी कर आसानी से नकद राशि मिल जाती है। कई मामलों में बिना खरीद बिल, शुद्धता जांच और स्रोत की पुष्टि किए ही लोन स्वीकृत कर दिया जाता है, जिससे अपराधियों के हौसले बुलंद हो रहे हैं।
उन्होंने मांग की कि यदि कोई व्यक्ति भारी मात्रा में पुराने जेवर लेकर बैंक पहुंचता है तो इसकी सूचना तत्काल स्थानीय पुलिस और सराफा एसोसिएशन को दी जाए। साथ ही गोल्ड लोन लेने वाले व्यक्ति के साथ परिवार के सदस्य की उपस्थिति भी अनिवार्य की जाए।
सुरक्षा मानकों की अनदेखी का आरोप
एसोसिएशन अध्यक्ष ने कहा कि सराफा व्यापारी संदिग्ध ग्राहकों से लेनदेन करने से बचते हैं, लेकिन कई बैंक केवल अपने लक्ष्य पूरे करने के लिए सुरक्षा मानकों की अनदेखी कर रहे हैं। चोरी का माल बैंक में गिरवी रखना न केवल अनैतिक है, बल्कि इससे जांच एजेंसियां भी गुमराह होती हैं।
ये प्रमुख मांगें रखीं_गोल्ड लोन के लिए मूल खरीद बिल अनिवार्य किया जाए। केवाईसी प्रक्रिया सख्ती से लागू हो। संदिग्ध लेनदेन की जानकारी पुलिस से साझा की जाए। बैंक, पुलिस और सराफा व्यापारियों का साझा नेटवर्क बनाया जाए।सराफा एसोसिएशन ने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते व्यवस्था में सुधार नहीं किया गया तो चोरी के जेवर खपाने का यह नेटवर्क और मजबूत हो सकता है।


