महासमुंद। शहर के अयोध्या नगर, अशोक वाटिका में रहने वाले 37 वर्षीय दिनेश साहू, पिता कलीराम राम साहू, ने 13 अगस्त की रात घरेलू विवाद के बाद फांसी लगाकर अपनी जान दे दी। मृतक पेशे से शिक्षा कर्मी थे।
घटना के दिन उनकी पत्नी चंदेश्वरी साहू अपने हर्बल लाइफ़ ग्रुप के साथ मुंबई गई हुई थीं। सूत्रों के अनुसार, 13 अगस्त की मध्यरात्रि लगभग 2 बजे पति-पत्नी के बीच मोबाइल फोन पर बातचीत के दौरान कहा-सुनी हुई। इसी दौरान दिनेश साहू ने व्हाट्सएप वीडियो कॉल पर पत्नी के सामने फांसी लगा ली।
बताया जाता है कि घटना के वक्त पत्नी ने अपने पड़ोसियों को फोन कर जानकारी देने की कोशिश की, लेकिन देर रात और गहरी नींद के कारण किसी ने कॉल रिसीव नहीं किया। सुबह मृतक के भाई ने पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है।
परिजनों और जान-पहचान के लोगों के अनुसार, दंपति की दो संतानें हैं—एक लगभग 6 वर्ष का और दूसरा ढाई-तीन वर्ष का। पत्नी हर्बल लाइफ़ कंपनी से जुड़कर कारोबार कर रही थीं, जबकि मृतक शिक्षक थे।
बढ़ते घरेलू विवाद और आत्महत्याओं पर चिंता
महासमुंद ही नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश और देश में पति-पत्नी के बीच घरेलू विवाद के चलते आत्महत्या की घटनाएं तेजी से बढ़ रही हैं। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में हर वर्ष हजारों विवाहित पुरुष और महिलाएं पारिवारिक कलह के कारण आत्महत्या का कदम उठाते हैं। छत्तीसगढ़ में भी बीते तीन वर्षों में वैवाहिक विवाद से जुड़ी आत्महत्याओं में लगभग 12% की वृद्धि दर्ज की गई है।
वैज्ञानिक दृष्टिकोण: क्यों होते हैं ऐसे कदम?
मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि आधुनिक जीवनशैली, कामकाज का दबाव, समय की कमी और आपसी संवाद की कमी वैवाहिक रिश्तों में तनाव का कारण बनते हैं।
पुरुषों के मामले में: पत्नी की स्वतंत्र सोच और सामाजिक सक्रियता को स्वीकार न कर पाना, आत्मसम्मान पर चोट महसूस होना।
महिलाओं के मामले में: पति का भावनात्मक समर्थन न मिलना और व्यक्तिगत पहचान बनाए रखने की चाहत।
इन परिस्थितियों में अचानक हुए विवाद के दौरान व्यक्ति इमोशनल ओवरलोड में चला जाता है और त्वरित, आवेगपूर्ण फैसले ले लेता है, जिसका नतीजा अक्सर आत्मघाती कदम के रूप में सामने आता है।
समाज के लिए संदेश
यह घटना केवल एक परिवार की त्रासदी नहीं, बल्कि समाज के लिए चेतावनी है कि रिश्तों में संवाद, समझ और धैर्य कितना जरूरी है।
विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि
पारिवारिक विवाद के समय तुरंत किसी भरोसेमंद व्यक्ति से बात करें। पेशेवर काउंसलिंग और हेल्पलाइन का सहारा लें। बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता दें, क्योंकि वे मौन दर्शक होते हुए भी गहरी चोट महसूस करते हैं
दिनेश साहू की मौत एक सवाल छोड़ जाती है—क्या एक बहस या तकरार किसी की जिंदगी से ज्यादा अहम हो सकती है? शायद नहीं। अब जरूरत है कि हम रिश्तों में अहमियत और सम्मान को फिर से जीवित करें, ताकि कोई और परिवार इस तरह की पीड़ा से न गुजरे।


