संवाददाता — बालाराम कोलते, भिलाईनगर
भिलाई — एशिया का सबसे बड़ा इस्पात नगर और छत्तीसगढ़ का गौरव, आज खुद अपनी पहचान खोने की कगार पर है। भिलाई स्टील प्लांट (BSP) जिसने बीते 70 वर्षों से देश की अर्थव्यवस्था, रोज़गार, शिक्षा, चिकित्सा और खेल जगत में अनगिनत सितारे पैदा किए, अब उसी शहर का अभिन्न हिस्सा — पंडित जवाहरलाल नेहरू हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर (सेक्टर-9 हॉस्पिटल) निजीकरण के भंवर में फंसता नजर आ रहा है।
गुपचुप दौरा और बढ़ता संदेह
सूत्रों के मुताबिक, हाल ही में केंद्रीय मंत्रालय की एक टीम ने सेक्टर-9 हॉस्पिटल का दौरा किया। यह दौरा पूरी तरह “गोपनीय” रखा गया। लेकिन, भिलाई के सेवानिवृत्त कर्मचारियों के संगठनों, श्रमिक यूनियनों (CITU) और अस्पताल के स्वास्थ्य कर्मियों के विरोध के बाद यह बात सामने आई कि कुछ तो अंदर ही अंदर पक रहा है।
क्या अस्पताल का निजीकरण होने जा रहा है?
भिलाई इस्पात संयंत्र के कर्मचारी और नागरिक आज यह सवाल पूछ रहे हैं, “क्या 70 साल तक जनता की सेवा करने वाला यह हॉस्पिटल अब किसी उद्योगपति के हवाले किया जाएगा?” लोगों में चर्चा है कि सेल प्रबंधन और केंद्र सरकार के बीच अंदरखाने में समझौते की तैयारियां चल रही हैं। यह वही अस्पताल है जिसने हजारों लोगों को जीवनदान दिया, जहां मुफ्त या सस्ती चिकित्सा सेवाएं मिलती थीं, और जो आज “बर्न यूनिट” और “विशेषज्ञ चिकित्सा सेवाओं” के लिए पूरे प्रदेश में मशहूर है।
सेवानिवृत्त कर्मचारी भयभीत, जनता में रोष
भिलाई के बुजुर्ग कर्मचारी, जिन्होंने अपना पूरा जीवन इस संयंत्र को खड़ा करने में लगा दिया, आज अपने इलाज के लिए असुरक्षा में जी रहे हैं। उन्हें डर है कि अगर यह अस्पताल निजी हाथों में चला गया,
तो इलाज महंगा होगा, और वे चिकित्सा सुविधाओं से वंचित हो जाएंगे। “हमने अपनी जवानी इस प्लांट को दी, अब बुढ़ापे में इलाज भी छीन लिया जाएगा क्या?” एक सेवानिवृत्त कर्मचारी की आंखों में आंसू लिए यह सवाल जनप्रतिनिधियों से जवाब मांगता है।
जनप्रतिनिधि आखिर मौन क्यों? सबसे बड़ा सवाल यही है, “भिलाई के जनप्रतिनिधि आखिर खामोश क्यों हैं?” चाहे वे सत्ता पक्ष से हों या विपक्ष से, किसी ने भी इस गंभीर मुद्दे पर खुलकर जनता को जानकारी नहीं दी। क्या “जनसेवा” के नाम पर चुने गए प्रतिनिधियों का यह मौन किसी साजिश का संकेत है?
भिलाई की जनता अब एकजुट होकर मांग कर रही है —
1. सेक्टर-9 हॉस्पिटल के संभावित निजीकरण पर सरकार को तत्काल सफाई देनी चाहिए। 2. अस्पताल और बीएसपी प्रबंधन के बीच हो रही सभी मीटिंग्स का ब्यौरा सार्वजनिक किया जाए। 3. जनप्रतिनिधि खुलकर बताएं कि वे इस मामले में जनता के साथ हैं या उद्योगपतियों के साथ।
भिलाई की पहचान, भिलाई की आवाज़
भिलाई सिर्फ इस्पात का शहर नहीं — यह मिनी भारत है,
जहां हर भाषा, हर संस्कृति के लोग मिलकर एक “राष्ट्र निर्माण” की कहानी लिखते आए हैं। लेकिन अब यही शहर सरकारी लापरवाही और पूंजीवादी मंशा की भेंट चढ़ने जा रहा है। अगर समय रहते जनता ने आवाज़ नहीं उठाई, तो कल जब यह अस्पताल भी किसी कॉरपोरेट के हवाले होगा, तब “भिलाई” सिर्फ एक नाम बनकर रह जाएगा, न सेवा बचेगी, न संवेदना।


