रायपुर। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाले में बड़ी कार्रवाई करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की करीबी मानी जाने वाली निलंबित IAS अधिकारी सौम्या चौरसिया को 16 दिसंबर को गिरफ्तार किया। उन्हें रायपुर की विशेष PMLA कोर्ट में पेश किया गया, जहां कोर्ट ने ED को 19 दिसंबर तक तीन दिनों की हिरासत दी है।
ED की जांच में खुलासा हुआ है कि इस घोटाले से राज्य को 2500 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हुआ और अपराध की कमाई (Proceeds of Crime) भी इतनी ही बताई जा रही है। सौम्या चौरसिया को इस घोटाले से करीब 115.5 करोड़ रुपये की अवैध कमाई प्राप्त होने के सबूत मिले हैं। डिजिटल रिकॉर्ड्स, जब्त सामग्री और बयानों से साबित होता है कि वे शराब सिंडिकेट की सक्रिय सदस्य थीं और प्रमुख सदस्यों जैसे अनिल टूटेजा तथा चैतन्य बघेल के बीच केंद्रीय समन्वयक की भूमिका निभाती थीं। चैट रिकॉर्ड्स से पता चलता है कि सिंडिकेट के गठन में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका थी, जिसमें अरुण पति त्रिपाठी और निरंजन दास जैसे लोगों को आबकारी विभाग में प्रमुख पदों पर नियुक्त कराने में मदद की गई।
यह घोटाला पूर्व कांग्रेस सरकार के कार्यकाल (2019-2022) में हुआ बताया जा रहा है, जिसमें अवैध कमीशन, नकली होलोग्राम और लाइसेंस के दुरुपयोग से बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार हुआ। ED ने यह जांच ACB/EOW की FIR पर आधारित शुरू की थी।
इस मामले में पहले ही कई बड़े नाम गिरफ्तार हो चुके हैं, जिनमें पूर्व IAS अनिल टूटेजा, अनवर ढेबर, त्रिलोक सिंह ढिल्लों, अरविंद सिंह, अरुण पति त्रिपाठी, पूर्व आबकारी मंत्री एवं विधायक कवासी लखमा तथा पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल शामिल हैं। ED की जांच जारी है और आने वाले दिनों में और खुलासे होने की संभावना है। यह मामला राज्य की राजनीति में नई हलचल पैदा कर सकता है।


