महासमुंद। छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल की 10वीं-12वीं बोर्ड परीक्षाएं 20 फरवरी से शुरू होने जा रही हैं और अब परीक्षा में 10 दिन से भी कम समय शेष रह गया है। ऐसे निर्णायक समय में जहां छात्र दिन-रात पढ़ाई में जुटे हैं, वहीं महासमुंद शहर में कानफोड़ू डीजे और लाउड स्पीकर बच्चों की तैयारी में सबसे बड़ी बाधा बनते जा रहे हैं।
शहर के विभिन्न इलाकों में देर रात तक तेज आवाज में डीजे और साउंड सिस्टम बजाए जा रहे हैं। न कोई समय सीमा का पालन, न ही ध्वनि मानकों की परवाह। इसका सीधा असर परीक्षा की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों पर पड़ रहा है, जिनकी पढ़ाई और मानसिक एकाग्रता लगातार बाधित हो रही है।
गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ राज्य सरकार और केंद्र सरकार दोनों ही “परीक्षा पर चर्चा” जैसे अभियानों के जरिए छात्रों को तनावमुक्त माहौल देने की बात कर रही हैं, लेकिन जमीनी हकीकत इसके बिल्कुल उलट नजर आ रही है। सवाल उठता है कि शहर में खुलेआम बज रहे लाउड स्पीकर और डीजे के बीच क्या बच्चों की पढ़ाई पूरी हो सकेगी?
सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि हाई कोर्ट द्वारा समय-समय पर लाउड स्पीकर, डीजे और ध्वनि प्रदूषण को लेकर दिए गए आदेश-निर्देशों की महासमुंद में खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। इसके बावजूद न तो पुलिस सक्रिय दिख रही है और न ही प्रशासन की ओर से कोई सख्त कार्रवाई नजर आ रही है।
स्थानीय नागरिकों और अभिभावकों में भारी नाराजगी है। उनका कहना है कि अगर यही हाल रहा तो बोर्ड परीक्षाओं के दौरान छात्रों को भारी नुकसान उठाना पड़ेगा। ऐसे में कानून व्यवस्था के जिम्मेदारों और प्रशासनिक अमले की भूमिका पर सवाल उठना लाजिमी है।
अब देखने वाली बात यह होगी कि परीक्षा से पहले प्रशासन नींद से जागता है या फिर छात्र कानफोड़ू शोर के बीच ही अपने भविष्य की परीक्षा देने को मजबूर होंगे।


