Monday, 22 Jun 2026

पीओजेके में फिर भड़का असंतोष, राजनीतिक अधिकार और स्वायत्तता को लेकर सड़क पर उतरे लोग

इस्लामाबाद। पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर (PoJK) एक बार फिर बड़े राजनीतिक और सामाजिक संकट से गुजर रहा है। क्षेत्र में शुरू हुए विरोध प्रदर्शनों ने प्रशासन और जनता के बीच तनाव बढ़ा दिया है। प्रदर्शनकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई, इंटरनेट सेवाओं पर रोक और बड़ी संख्या में सुरक्षा बलों की तैनाती से हालात गंभीर बने हुए हैं।

स्थिति को नियंत्रित करने के लिए स्थानीय प्रशासन ने संघीय सरकार से करीब 14 हजार अतिरिक्त सुरक्षा कर्मियों की मांग की है। वहीं, बिगड़ती स्थिति को देखते हुए 5 जून से 20 जून तक पर्यटन गतिविधियों को सीमित करने की अपील की गई है। इस्लामाबाद स्थित अमेरिकी दूतावास ने भी PoJK में मौजूद अपने नागरिकों को सतर्क रहने की सलाह दी है।

झड़पों में 12 लोगों की मौत, 73 घायल

7 जून 2026 को सुरक्षा बलों और जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) के समर्थकों के बीच हुई झड़पों के बाद हालात और बिगड़ गए। इन घटनाओं में 12 लोगों की मौत हुई, जिसमें 8 नागरिक और 4 पुलिसकर्मी शामिल बताए गए हैं। इसके अलावा 73 लोग घायल हुए हैं, जिनमें सुरक्षा बलों के 23 जवान और 50 नागरिक शामिल हैं। प्रशासन का दावा है कि हिंसक भीड़ ने एक अस्पताल को निशाना बनाया था, जिसके बाद सुरक्षा बलों ने कार्रवाई की। वहीं प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि कार्रवाई के दौरान बल प्रयोग किया गया और लोगों को निशाना बनाया गया।

12 विधानसभा सीटों का मुद्दा बना विवाद की वजह

वर्तमान आंदोलन का सबसे बड़ा मुद्दा PoJK विधानसभा में जम्मू-कश्मीर से पाकिस्तान जाकर बसे शरणार्थियों के लिए आरक्षित 12 सीटों का है। JAAC इन सीटों को समाप्त करने की मांग कर रहा है। संगठन का कहना है कि इन सीटों के कारण पाकिस्तान की मुख्यधारा की राजनीतिक पार्टियों का PoJK की राजनीति में प्रभाव बढ़ता है। मामला उस समय और संवेदनशील हो गया जब PoJK के सर्वोच्च न्यायालय ने इन आरक्षित सीटों को संवैधानिक मान्यता देते हुए कहा कि इन्हें खत्म करने के लिए संवैधानिक संशोधन जरूरी होगा।

आर्थिक मांगों से शुरू हुआ आंदोलन अब राजनीतिक मुद्दा बना

JAAC का आंदोलन शुरुआत में बिजली दरों में बढ़ोतरी, महंगाई, बेरोजगारी और प्रशासनिक समस्याओं को लेकर शुरू हुआ था। लेकिन समय के साथ आंदोलन का स्वरूप बदल गया और अब यह राजनीतिक प्रतिनिधित्व, अधिकारों और स्थानीय नियंत्रण की मांग का रूप ले चुका है। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि PoJK में प्रशासनिक और राजनीतिक फैसलों पर इस्लामाबाद का अत्यधिक प्रभाव है। उनका कहना है कि क्षेत्रीय लोगों को अपने संसाधनों और शासन व्यवस्था में अधिक अधिकार मिलने चाहिए।

 

2025 के समझौते के बाद भी नहीं थमा विवाद

इससे पहले सितंबर और अक्टूबर 2025 में भी PoJK में बड़े विरोध प्रदर्शन हुए थे। इन प्रदर्शनों में 10 से अधिक लोगों की मौत और 100 से ज्यादा लोगों के घायल होने की बात सामने आई थी।

इसके बाद संघीय सरकार, PoJK प्रशासन और JAAC के बीच 4 अक्टूबर को समझौता हुआ था। इसमें मुआवजा, बिजली और गेहूं सब्सिडी, प्रशासनिक सुधार, स्वास्थ्य एवं शिक्षा व्यवस्था सुधारने जैसे मुद्दे शामिल थे। सरकार का दावा था कि JAAC की 38 में से 36 मांगें पूरी कर दी गई हैं, लेकिन संगठन ने इसे स्वीकार नहीं किया और 9 जून से अनिश्चितकालीन हड़ताल की घोषणा कर दी।

प्रतिबंध के बाद बढ़ा तनाव

5 जून को प्रशासन ने सार्वजनिक व्यवस्था और सुरक्षा का हवाला देते हुए JAAC पर प्रतिबंध लगा दिया। इसके बाद संगठन से जुड़े कई लोगों की गिरफ्तारी हुई, जिससे विरोध और तेज हो गया।

आगे की चुनौती

PoJK में जारी आंदोलन यह संकेत देता है कि क्षेत्र में राजनीतिक और आर्थिक असंतोष अभी भी बना हुआ है। बेरोजगारी, कमजोर बुनियादी सुविधाएं, ऊर्जा संकट और राजनीतिक उपेक्षा की भावना लोगों में नाराजगी बढ़ा रही है।

27 जुलाई 2026 को प्रस्तावित विधानसभा चुनावों से पहले हालात और संवेदनशील हो सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि केवल अस्थायी राहत के बजाय राजनीतिक और प्रशासनिक सुधारों पर ध्यान देना जरूरी होगा। PoJK का मौजूदा संकट लंबे समय से चले आ रहे अधिकार, प्रतिनिधित्व और स्वायत्तता के सवालों को फिर सामने ला रहा है। यदि इन मुद्दों का स्थायी समाधान नहीं निकला तो विरोध और प्रशासनिक सख्ती का दौर आगे भी जारी रह सकता है।

— अजीत कुमार सिंह

सीनियर फेलो, इंस्टीट्यूट फॉर कॉन्फ्लिक्ट मैनेजमेंट

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