फिंगेश्वर (गरियाबंद)। अवैध रेत खनन और परिवहन का खेल अब दिन-दहाड़े चल रहा था, लेकिन बुधवार शाम प्रशासन की संयुक्त टीम ने आखिरकार नागझर रेत घाट पर छापा मारकर रेत माफियाओं की कमर तोड़ दी। गरियाबंद माइनिंग अधिकारी अर्चना ठाकुर, छुरा एसडीएम अंजलि खड़को, तहसीलदार गेंदलाल साहू और फिंगेश्वर थाना प्रभारी गौतम गावडे की टीम ने मौके पर 11 हाईवा गाड़ियां और एक चेन माउंटेन मशीन जब्त की।
जानकारी के अनुसार, बिना किसी माइनिंग स्वीकृति के रेत माफिया रोजाना 50 से 100 हाईवा गाड़ियों से रेत लूट रहे थे, जिससे राज्य को लाखों-करोड़ों का राजस्व नुकसान हो रहा था। क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों और आम नागरिकों की शिकायतों पर कार्रवाई हुई, जहां दिनदहाड़े रेत से लदी गाड़ियां सड़कों पर दौड़ रही थीं और दुर्घटनाओं का खतरा मंडरा रहा था। रात के अंधेरे में तो यह चोरी-छिपे और भी तेज हो जाता था।
प्रशासन की इस कार्रवाई से कुछ हद तक राजस्व की रक्षा हुई है, लेकिन सवाल यह है कि इतने दिनों तक रेत माफिया इतने बेखौफ कैसे थे? क्या कुछ राजनेता और सरकारी मुलाजिमों की मिलीभगत से यह माफिया राज चल रहा था? क्योंकि छत्तीसगढ़ में रेत माफियाओं की गुंडागर्दी कोई नई बात नहीं – पत्रकारों पर हमले, अधिकारियों को धमकाना, फायरिंग तक की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। फिर भी, कुछ लोग ‘सिस्टम’ में बैठे रहकर माफियाओं को संरक्षण देते नजर आते हैं।
फिंगेश्वर थाना प्रभारी गौतम गावडे ने जब्त वाहनों के बारे में जानकारी दी है, लेकिन अब असली चुनौती है – क्या इन माफियाओं के पीछे के ‘बड़े हाथों’ तक पहुंच बन पाएगी? अगर कार्रवाई सिर्फ छोटे-मोटे ठेकेदारों तक सीमित रही और बड़े ‘संरक्षक’ बचे रहे, तो यह महज दिखावा साबित होगा।
क्षेत्रवासियों की मांग है कि रेत घाटों पर सख्त निगरानी, नियमित छापेमारी और दोषियों पर कड़ी सजा हो, ताकि माफिया के हौसले पस्त हों। अन्यथा, ‘सफेद रेत’ का ‘काला खेल’ जारी रहेगा और आम आदमी का नुकसान होता रहेगा। प्रशासन ने एक अच्छी शुरुआत की है, अब इसे लगातार बनाए रखने की जरूरत है – वरना रेत माफिया फिर से सिर उठा लेंगे!


