व्यापारी से करोड़ों की उगाही, संदिग्ध वित्तीय लेन-देन और नक्सल सूचना लीक के आरोप प्रमाणित; शासन ने सख्त कार्रवाई कर जीरो टॉलरेंस नीति दोहराई
महासमुंद/रायपुर। छत्तीसगढ़ पुलिस में बड़ा हड़कंप मचा दिया है। गृह (पुलिस) विभाग ने दंतेवाड़ा में तैनात उप पुलिस अधीक्षक (डीएसपी) कल्पना वर्मा को भ्रष्टाचार, पद के दुरुपयोग और अवैध संपत्ति अर्जन के गंभीर आरोपों में तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।

प्रारंभिक जांच रिपोर्ट में आरोप सही पाए जाने के बाद राज्य शासन ने छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम, 1966 के नियम-9 के तहत यह कड़ा फैसला लिया है। जांच में वित्तीय अनियमितताएं, व्हाट्सएप चैट में विरोधाभासी बयान, कर्तव्य के दौरान अवैध आर्थिक लाभ, पद का दुरुपयोग और आय से असंगत संपत्ति अर्जन जैसे तथ्य सामने आए हैं। ये सब छत्तीसगढ़ सिविल सेवा आचरण नियम, 1965 के नियम-3 का स्पष्ट उल्लंघन साबित हुए।
रायपुर के होटल कारोबारी दीपक टंडन की शिकायत पर आधारित जांच में करोड़ों रुपये नकद, डायमंड रिंग, गोल्ड ज्वेलरी, लग्जरी कार और अन्य संपत्ति जबरन ऐंठने के सबूत मिले। व्हाट्सएप चैट और वीडियो में संदिग्ध लेन-देन के स्पष्ट संकेत। नक्सल ऑपरेशन से जुड़ी संवेदनशील जानकारी लीक करने का गंभीर आरोप, जो राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा माना जा रहा है। प्रेम संबंध के बहाने ब्लैकमेल और धोखाधड़ी के दावे, जिनकी जांच में पुष्टि हुई। निलंबन आदेश में स्पष्ट किया गया है कि जांच अवधि में कल्पना वर्मा का मुख्यालय पुलिस मुख्यालय, नवा रायपुर (अटल नगर) रहेगा। उन्हें नियमानुसार केवल जीवन निर्वाह भत्ता (subsistence allowance) मिलेगा।
एक वरिष्ठ महिला अधिकारी के निलंबन से पूरे छत्तीसगढ़ पुलिस विभाग में हलचल मच गई है। यह कार्रवाई विष्णु देव साय सरकार की भ्रष्टाचार पर शून्य सहनशीलता की नीति का सख्त संदेश है। अब सभी की नजरें विभागीय जांच और संभावित आपराधिक मुकदमे पर टिकी हैं क्या और बड़े खुलासे होंगे? क्या नक्सल क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था प्रभावित हुई?
शासन के सूत्रों का कहना है पद और वर्दी की आड़ में कोई भी भ्रष्टाचार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा, चाहे आरोपी कितना भी वरिष्ठ हो। आगे की जांच में यदि आरोप सिद्ध हुए तो कड़ी सजा और बर्खास्तगी तक की कार्रवाई हो सकती है। यह मामला न केवल पुलिस महकमे की छवि पर सवाल उठा रहा है, बल्कि नक्सल प्रभावित दंतेवाड़ा जैसे संवेदनशील इलाके में तैनात अधिकारियों की जवाबदेही पर भी गंभीर बहस छेड़ रहा है।


