महासमुंद। शहर कांग्रेस कमेटी महासमुंद के मंडल अध्यक्ष एवं अधिवक्ता खिलावन बघेल ने सरकारी स्कूलों के विद्यार्थियों को राजनीतिक व सरकारी आयोजनों में बुलाए जाने पर आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा कि इससे बच्चों की नियमित पढ़ाई प्रभावित हो रही है और स्कूलों की पहली जिम्मेदारी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देना है।
प्रेस विज्ञप्ति में श्री बघेल ने आरोप लगाया कि बच्चों को रात में दीया जलाने के लिए स्कूलों में बुलाया जा रहा है। उन्होंने सवाल किया कि रात में किसी विद्यार्थी के साथ अनहोनी हो गई तो जिम्मेदारी किसकी होगी। उनका कहना है कि दिनभर तेज धूप में बच्चों से बड़ी रंगोली बनवाई जा रही है और पालक व शिक्षक मूकदर्शक बने हुए हैं। उन्होंने इसे भाजपा की छवि चमकाने का प्रयास बताया। उन्होंने प्रदेश में छात्र-छात्राओं पर चाकूबाजी और एसिड अटैक की घटनाओं, नाबालिगों में नशे की प्रवृत्ति और खुलेआम चाकू-तलवार लेकर घूमने पर चिंता जताते हुए पुलिस-प्रशासन और सरकार की भूमिका पर सवाल उठाए।
श्री बघेल ने संविधान के अनुच्छेद 21A, शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009, राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 और बाल अधिकार संरक्षण आयोग अधिनियम 2005 का हवाला देते हुए कहा कि बच्चों के शिक्षा अधिकार, सुरक्षा और गरिमा से समझौता नहीं होना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह मुद्दा किसी दल के पक्ष-विपक्ष का नहीं, बल्कि शिक्षा की प्राथमिकता का है। शैक्षणिक उद्देश्य वाले, आयु-उपयुक्त और सुरक्षित आयोजनों में सहभागिता उचित हो सकती है, पर भीड़ बढ़ाने या मंच सजाने के लिए बच्चों को कक्षा से बाहर करना गलत है।
शासन-प्रशासन से सवाल एवं मांग श्री बघेल ने पूछा कि क्या आयोजनों से पहले पढ़ाई पर पड़ने वाले असर का आकलन होता है, क्या अभिभावकों और स्कूल प्रबंधन समितियों की राय ली जाती है और क्या बाधित शिक्षण समय की भरपाई की जाती है।
उन्होंने सभी दलों और सरकारों से साझा संकल्प लेने की अपील की कि स्कूलों को राजनीति का मंच नहीं बनाया जाएगा, शिक्षण समय बाधित नहीं होगा और बच्चों को प्रचार या शक्ति-प्रदर्शन का साधन नहीं बनाया जाएगा। साथ ही उन्होंने मांग की कि जिन स्कूलों में अब तक निःशुल्क पाठ्यपुस्तकों का वितरण नहीं हुआ है, उसकी जांच कर तुरंत वितरण कराया जाए। उन्होंने कहा, “बच्चों को मंच नहीं, पुस्तक चाहिए; नारे नहीं, शिक्षा चाहिए; भीड़ नहीं, बेहतर भविष्य चाहिए।”


