महासमुंद/पिथौरा। महासमुंद जिले के सरीफाबाद गांव में जमीन की खरीदी-बिक्री का एक मामला सामने आया है। आरोप है कि एक जीवित व्यक्ति टीकमलाल को सरकारी दस्तावेजों में मृत बताकर उनके परिवार की जमीन बेच दी गई। इस मामले में पटवारी राजेंद्र डोंगरे की भूमिका पर सवाल उठाए गए हैं। वहीं, जमीन दलाल निखिल अग्रवाल को जमीन बेचे जाने का भी आरोप है। मामले की सच्चाई सामने लाने के लिए पूरे प्रकरण की जांच कराने की मांग की जा रही है।
मिली जानकारी के अनुसार, ग्राम सोनपुर, जिला बलौदाबाजार-भाटापारा निवासी जयलाल पिता फोटोलाल ने शपथ पत्र के माध्यम से बताया है कि उनके दादा रामलाल पिता विष्णु के नाम पर ग्राम सरीफाबाद में जमीन दर्ज थी। इसमें खसरा नंबर 318 की 0.84 हेक्टेयर और खसरा नंबर 320 की 0.37 हेक्टेयर जमीन शामिल है। दोनों जमीनों का कुल रकबा 1.21 हेक्टेयर है। शपथ पत्र के अनुसार, रामलाल की मृत्यु 3 जून 2017 को हो गई थी। उनके वारिसों के निधन का उल्लेख करते हुए जमीन के खाते को दुरुस्त कर वैधानिक उत्तराधिकारियों के नाम दर्ज करने की बात कही गई थी।
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल टीकमलाल को लेकर उठ रहा है। आरोप है कि टीकमलाल के जीवित होने के बावजूद उन्हें सरकारी दस्तावेजों में मृत बताया गया और इसके बाद जमीन की खरीदी-बिक्री कर दी गई। इस प्रक्रिया में पटवारी राजेंद्र डोंगरे की भूमिका की जांच कराने की मांग की जा रही है। हालांकि, आरोपों की पुष्टि संबंधित दस्तावेजों और आधिकारिक जांच के बाद ही हो सकेगी।
मामले को लेकर यह मांग भी उठ रही है कि प्रशासन सरीफाबाद में सरकारी जमीनों की खरीदी-बिक्री और जमीन से जुड़े अन्य संदिग्ध मामलों की जांच कराए। जांच में यह पता लगाया जाए कि जमीनों का नामांतरण किस आधार पर हुआ, दस्तावेजों में बदलाव किसने किए और इस पूरे मामले में कौन-कौन लोग शामिल हैं। जिला प्रशासन और राजस्व विभाग से मांग है कि संबंधित जमीन के रिकॉर्ड, नामांतरण दस्तावेज, मृत्यु प्रमाण पत्र, वारिसान संबंधी कागजात और पंजीकृत विक्रय पत्रों की जांच की जाए। संबंधित अधिकारियों और जमीन की खरीदी-बिक्री से जुड़े लोगों की जांच की जाए।
अब सवाल यह है कि यदि टीकमलाल जीवित हैं, तो उन्हें मृत किस आधार पर बताया गया और जमीन की बिक्री कैसे हुई? सरीफाबाद में सरकारी जमीनों की खरीदी-बिक्री के मामलों में भी कौन-कौन लोग शामिल हैं, इसकी निष्पक्ष जांच की जानी चाहिए।


