Tuesday, 13 Oct 2026

मानसिक रोगों को लेकर भ्रांतियां दूर करना और समय पर उपचार जरूरी: डॉ. सर्वेश दूबे

महासमुंद। विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर शनिवार को खैरा स्थित जीएनएम ट्रेनिंग सेंटर में मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रम आयोजित हुआ। शासकीय आयुष पॉली क्लिनिक महासमुंद के समीप संचालित इस केंद्र में आयुर्वेद चिकित्सा अधिकारी डॉ. सर्वेश दूबे ने प्रशिक्षणार्थियों और कर्मचारियों को मानसिक स्वास्थ्य के महत्व, रोगों के लक्षण, बचाव एवं उपचार की जानकारी दी। कार्यक्रम में करीब 45 प्रशिक्षणार्थी और कर्मचारी शामिल हुए।

डॉ. दूबे ने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य समग्र स्वास्थ्य का अहम हिस्सा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार स्वास्थ्य का अर्थ केवल रोग या दुर्बलता का न होना नहीं, बल्कि शारीरिक, मानसिक और सामाजिक कल्याण की अवस्था है। उन्होंने बताया कि तनाव, अवसाद, चिंता और नींद संबंधी समस्याएं व्यक्ति के निजी, पारिवारिक और सामाजिक जीवन को प्रभावित कर सकती हैं, इसलिए इन्हें नजरअंदाज करने के बजाय समय पर सहायता लेना जरूरी है।

उन्होंने अवसाद, एंग्जायटी, अत्यधिक तनाव, नशे के सेवन से उत्पन्न समस्याओं, सिजोफ्रेनिया तथा बच्चों और किशोरों में मानसिक परेशानियों के सामान्य लक्षणों की जानकारी दी। साथ ही समाज में व्याप्त भ्रांतियों और भेदभाव को दूर करने, पीड़ित व्यक्तियों के प्रति संवेदनशील व्यवहार रखने और जरूरत पड़ने पर योग्य विशेषज्ञ से परामर्श लेने की अपील की।

जीवनशैली और मानसिक स्वास्थ्य के संबंध पर डॉ. दूबे ने कहा कि अनियमित दिनचर्या, कम नींद, शारीरिक निष्क्रियता, असंतुलित आहार और लगातार तनाव स्वास्थ्य पर बुरा असर डालते हैं। नियमित व्यायाम, संतुलित आहार, पर्याप्त नींद, योग, प्राणायाम, ध्यान और सकारात्मक सामाजिक सहयोग से मानसिक स्वास्थ्य बेहतर रहता है। उन्होंने मधुमेह, उच्च रक्तचाप और मोटापे जैसी बीमारियों का भी मानसिक स्वास्थ्य से परस्पर संबंध होने की बात कही। आयुर्वेदिक दृष्टिकोण रखते हुए उन्होंने आहार, विहार, सद्वृत्त, मानसिक संतुलन और नियमित दिनचर्या के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि मानसिक रोगियों की भावनाओं को समझना, उनकी बात ध्यान से सुनना और समय पर उपचार दिलाना बेहद महत्वपूर्ण है।

इस वर्ष की थीम “Lived Experiences Heard: Real Voices, Real Change” (अनुभवों को मिले आवाज़, वास्तविक बदलाव की हो शुरुआत) का उल्लेख करते हुए डॉ. दूबे ने कहा कि मानसिक समस्याओं से जूझ रहे लोगों के अनुभवों को गंभीरता से सुनना, उनकी गरिमा का सम्मान करना और उन्हें उचित सहयोग देना आवश्यक है। उन्होंने प्रशिक्षणार्थियों से अपने कार्यक्षेत्र और समुदाय में जागरूकता फैलाने तथा जरूरतमंदों को समय पर मदद लेने के लिए प्रेरित करने का आग्रह किया।

कार्यक्रम में आयुर्वेद फार्मासिस्ट श्री नरेश कुमार गायकवाड़ ने सहयोग प्रदान किया। आयोजन का उद्देश्य मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाना, मानसिक रोगों से जुड़े सामाजिक कलंक को कम करना और एक स्वस्थ व संवेदनशील समाज के निर्माण के लिए लोगों को प्रेरित करना रहा।

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