Saturday, 7 Mar 2026

खाद्य एवं औषधि प्रशासन की नींद क्यों नहीं टूट रही?जर्दा युक्त गुटखा का खुला कारोबार,

महासमुंद। छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा वर्षों पहले जर्दा युक्त गुटखा पर लगाए गए पूर्ण प्रतिबंध के बावजूद महासमुंद शहर के मुख्य बाजारों, गलियों और पान ठेलों पर यह घातक जहर बेखौफ बिक रहा है। राजश्री, सितार, सहित जैसे प्रतिबंधित ब्रांड खुलेआम उपलब्ध हैं, जबकि कारोबारी इन्हें बड़े पैमाने पर डंप कर स्टॉक जमा कर रहे हैं और मांग के अनुसार महंगे दामों पर बेचकर काला मुनाफा कमा रहे हैं।

यह अवैध धंधा न केवल कानून की धज्जियां उड़ा रहा है, बल्कि जन स्वास्थ्य के साथ सीधा खिलवाड़ कर रहा है। चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार जर्दा युक्त गुटखा मुंह के कैंसर का प्रमुख कारण है, फिर भी प्रशासन की आंखें मूंदी हुई हैं। शहर के दर्जनों पान की दुकानों और किराना स्टोर्स पर ये उत्पाद आसानी से मिल जाते हैं, जबकि भंडारण, परिवहन और विक्रय तीनों स्तरों पर सख्त प्रतिबंध है।

खाद्य एवं औषधि विभाग की चुप्पी पर सवाल

खाद्य एवं औषधि प्रशासन (फूड एंड ड्रग्स विभाग), पुलिस, नगर पालिका और जिला प्रशासन जैसे जिम्मेदार विभागों की मौजूदगी के बावजूद यह कारोबार फल-फूल रहा है। क्या विभागों को इस अवैध व्यापार की भनक तक नहीं है? या फिर जानबूझकर अनदेखी की जा रही है? सूत्रों का कहना है कि कुछ कारोबारी अधिकारियों की कथित मिलीभगत से स्टॉक जमा कर महंगी कीमत वसूल रहे हैं। प्रतिबंध के नाम पर केवल कागजी कार्रवाई हो रही है, जबकि जमीनी हकीकत बिल्कुल अलग है।

प्रदेश में जर्दा युक्त गुटखा पर प्रतिबंध लगे कई साल हो चुके हैं, लेकिन महासमुंद में हालात ऐसे हैं मानो कोई कानून ही न हो। पड़ोसी जिलों और राज्यों में समय-समय पर छापेमारी हो रही है, लाखों-करोड़ों का माल जब्त हो रहा है, लेकिन यहां विभाग की तरफ से कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा। क्या फूड एंड ड्रग्स विभाग सिर्फ फाइलों में रिपोर्ट तैयार करने तक सीमित रह गया है? क्या यह विभाग जन स्वास्थ्य की रक्षा करने के बजाय मुनाफाखोरों को संरक्षण दे रहा है?

जनता में रोष, तत्काल कार्रवाई की मांग

स्थानीय नागरिकों में इस मुद्दे पर गहरा आक्रोश है। लोगों का कहना है कि सरकार जन स्वास्थ्य की बात करती है, लेकिन हकीकत में कानून का पालन नहीं करवा पा रही। उन्होंने जिला प्रशासन से मांग की है कि अवैध गुटखा कारोबारियों पर तुरंत सख्त कार्रवाई हो। प्रतिबंधित उत्पादों की जब्ती कर उनका सार्वजनिक नष्टिकरण किया जाए। लापरवाह अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए और विभागीय स्तर पर जांच हो।

अब सवाल यह है कि क्या महासमुंद प्रशासन इस गंभीर जन स्वास्थ्य संकट पर जागेगा? या फिर प्रतिबंध सिर्फ कागजों की शोभा बढ़ाने तक सीमित रह जाएगा? खाद्य एवं औषधि विभाग को जवाब देना होगा कि आखिर यह जहर बाजार में कैसे फल-फूल रहा है और विभाग की भूमिका क्या है? जनता इंतजार कर रही है कार्रवाई की, नहीं तो यह जहर और तेजी से फैलेगा।

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