बारिश में टापू बन जाता है गांव, 141 बच्चे उफनता नाला पार कर जाने को मजबूर; ग्रामीणों ने दी आंदोलन और चुनाव बहिष्कार की चेतावनी
महासमुंद। जिला मुख्यालय से करीब 18 किलोमीटर दूर और राष्ट्रीय राजमार्ग-353 से महज साढ़े तीन किलोमीटर अंदर स्थित खल्लारी विधानसभा क्षेत्र का आश्रित ग्राम पड़कीपाली आज भी बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहा है। करीब 400 की आबादी वाले इस आदिवासी बहुल गांव को 25 साल में अब तक पक्की सड़क और नंदी नाले पर पुल नहीं मिल सका है। बारिश के दिनों में गांव का संपर्क लगभग कट जाता है और ग्रामीणों को आवागमन के लिए परेशानी उठानी पड़ती है।
गांव में पांचवीं तक स्कूल है। इसके बाद करीब 141 बच्चे कमरौद जाने के लिए नंदी नाला पार करते हैं। जलस्तर बढ़ने पर बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होती है। ग्रामीणों के अनुसार सड़क की खराब स्थिति के कारण 108, 102 और 112 जैसी आपात सेवाएं भी गांव तक पहुंचने में दिक्कत होती है। गंभीर मरीजों को चारपाई के सहारे मुख्य मार्ग तक ले जाना पड़ता है।
घोषणा हुई, लेकिन सड़क-पुल का इंतजार जारी
ग्रामीणों के मुताबिक विधानसभा स्तरीय भेंट-मुलाकात कार्यक्रम के दौरान तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सड़क और पुल निर्माण की घोषणा की थी, लेकिन अब तक इसका स्थायी समाधान नहीं हो पाया। राशन के लिए मरार कसहीबाहरा, धान बेचने चरौदा और मतदान के लिए ओकारबंद जाने में भी ग्रामीणों को खराब रास्ते से गुजरना पड़ता है।
ग्रामीणों ने खुद बनाए पुल, अब पक्के समाधान की मांग
सड़क और पुल नहीं बनने पर ग्रामीणों ने पहले लकड़ी का अस्थायी पुल बनाया। वर्ष 2015 में श्रमदान से करीब 40 फीट का छोटा पुल बनाया गया। वर्ष 2025 में एक सामाजिक संस्था द्वारा दुहानी नाले पर पुल बनाए जाने से कुछ राहत मिली, लेकिन मुख्य नंदी नाले और सड़क की समस्या अब भी बनी हुई है। ग्रामीणों का कहना है, “जहां कार नहीं पहुंचती, वहां सरकार भी नहीं पहुंचती।”
अब ‘सड़क नहीं तो वोट नहीं’ की चेतावनी
ग्रामीण भागवत प्रसाद ध्रुव, थानसिंग यादव, भुनेश निषाद, एवन ध्रुव सहित अन्य ग्रामीणों ने कहा कि सड़क और नंदी नाले पर पुल का निर्माण जल्द शुरू नहीं हुआ तो आंदोलन और चुनाव बहिष्कार की रणनीति बनाई जाएगी। ग्रामीणों का कहना है कि पहले भी आश्वासन मिले, लेकिन समस्या जस की तस है। जर्जर आंगनबाड़ी भवन सहित स्वास्थ्य, शिक्षा और बैंकिंग जैसी सुविधाओं के लिए भी गांव दूसरे स्थानों पर निर्भर है। ग्रामीणों की मांग है कि साढ़े तीन किलोमीटर सड़क और नंदी नाले पर पुल का निर्माण प्राथमिकता से कराया जाए, क्योंकि यह केवल आवागमन का नहीं, बल्कि बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य और ग्रामीणों की सुरक्षा से जुड़ा सवाल है।



